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    जगन्नाथ मेले में श्रद्धालुओं को पिलाया मीठा जल, बंटी श्रद्धा व सेवा की मिसाल

    मिशनसच टीम, अलवर। 

    अलवर। सामाजिक सेवा और समर्पण की भावना से ओतप्रोत चित्रगुप्त वंश मंच एवं कायस्थ सभा, अलवर द्वारा जगन्नाथ जी महाराज के पावन मेले के अवसर पर एक सराहनीय पहल करते हुए मीठे जल की प्याऊ का आयोजन किया गया। इस आयोजन में श्रद्धालुओं को न केवल शीतल शरबत पिलाया गया, बल्कि सेवा, सौहार्द और सद्भाव का भी संदेश दिया गया।

    कार्यक्रम की शुरुआत चित्रगुप्त भगवान की पूजा-अर्चना से हुई। कायस्थ समाज के लोगों ने पूरे विधि-विधान से पूजा कर समाज की एकता और उन्नति की प्रार्थना की। पूजा उपरांत सभा के मुख्य द्वार पर मीठे जल की प्याऊ स्थापित की गई, जिसमें समाज के गणमान्यजनों के साथ-साथ युवाओं और महिलाओं ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई।

    चित्रगुप्त वंश मंच के प्रमुख राजू माथुर ने बताया कि इस सेवा कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल श्रद्धालुओं की प्यास बुझाना था, बल्कि समाज में सेवा और सहयोग की संस्कृति को बढ़ावा देना भी था। उन्होंने कहा कि हर वर्ष की भांति इस बार भी चित्रांश समाज ने मेले के अवसर पर सामाजिक उत्तरदायित्व निभाते हुए इस आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न किया।

    इस मौके पर कायस्थ सभा अलवर के अध्यक्ष अविनाश माथुर के नेतृत्व में एक मजबूत टीम ने व्यवस्थाएं संभालीं। प्याऊ सेवा में भाग लेने वालों में कई वरिष्ठ और प्रतिष्ठित सदस्य मौजूद रहे, जिनमें नरेंद्र कुमार माथुर, कुलदीप माथुर, दिनेश माथुर, अक्षय कुलश्रेष्ठ, अजय माथुर, कमलेश नारायण माथुर, सुरेश सैनी, मनोज कुमार दीक्षित, प्रदीप माथुर, सुशील गंगावत, भानु माथुर, सुरेंद्र सक्सेना, दीपक माथुर, अतुल सक्सेना और प्रवीण माथुर प्रमुख रूप से शामिल रहे।

    सेवा में समाज की महिलाओं और बच्चों की भागीदारी भी विशेष रही। उन्होंने न केवल शरबत तैयार करने में सहयोग किया, बल्कि आने-जाने वाले श्रद्धालुओं को मुस्कुराहट के साथ शरबत पिलाया और स्वागत किया। समाज के बुजुर्गों ने इस आयोजन को ‘पुन्य का कार्य’ बताया और आने वाली पीढ़ी को इस परंपरा को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

    प्याऊ स्थल पर श्रद्धालुओं के लिए बैठने, छाया और ठंडी हवा की व्यवस्था भी की गई थी। जगह-जगह बैनर लगाकर लोगों को प्याऊ स्थल की जानकारी दी गई। आने-जाने वाले श्रद्धालुओं ने मीठा शरबत पीकर गर्मी से राहत महसूस की और इस सेवा भावना की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।

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