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    जनाधार की ताकत: ‘जननेता’ रामहेत यादव की सक्रियता आज भी बरकरार

    सियासी चर्चाओं में नाम: ‘जननेता’ रामहेत यादव को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी

    किशनगढ़ बास। चुनावी हार-जीत से परे राजनीति में कुछ ऐसे चेहरे होते हैं जिनकी जमीनी पकड़ समय के साथ और मजबूत होती जाती है। किशनगढ़ बास के पूर्व विधायक रामहेत यादव ऐसे ही नेताओं में शुमार हैं। 2018 और 2023 के विधानसभा चुनावों में हार के बावजूद क्षेत्र में उनकी ‘जननेता’ वाली पहचान आज भी कायम है। भाजपा संगठन में करीब 45 वर्षों से सक्रिय रामहेत यादव को अब राजस्थान के किसी राज्य बोर्ड, निगम या आयोग में बड़ी जिम्मेदारी मिलने की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

    जननेता रामहेत यादव
    जननेता रामहेत यादव

    जननेता रामहेत यादव वर्ष 2008 से 2018 तक लगातार दो बार किशनगढ़ बास से विधायक रहे। वर्तमान में वे भाजपा राष्ट्रीय परिषद सदस्य और प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य हैं। सत्ता में रहते हुए ही नहीं, बल्कि विपक्ष में रहने के दौरान भी उन्होंने आमजन के बीच लगातार सक्रिय रहकर अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी।

    क्षेत्र में जनकल्याण शिविरों से लेकर तिरंगा रैली जैसे आयोजनों तक उनकी मौजूदगी हमेशा चर्चा में रहती है। वे खुद लोगों के बीच जाकर योजनाओं की जानकारी देते हैं और पात्र लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। संगठनात्मक कार्यक्रमों को जिम्मेदारी के साथ सफल बनाने की उनकी कार्यशैली कार्यकर्ताओं के बीच उन्हें अलग पहचान देती है।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उनकी सभाओं में लगातार उमड़ने वाली भीड़ और कार्यकर्ताओं की मजबूत टीम उनकी लोकप्रियता का बड़ा प्रमाण है। भाजपा संगठन में वर्ष 1980 से विभिन्न पदों पर कार्य करते हुए उन्होंने जिले में पार्टी की जड़ों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    जननेता रामहेत यादव के राजनीतिक जीवन में सिक्किम के राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर को उनका राजनीतिक गुरु माना जाता है, वहीं केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से उनकी करीबी भी संगठन में उनकी मजबूत स्थिति को दर्शाती है।

    राजनीतिक उतार-चढ़ाव के बावजूद जनता के बीच लगातार संवाद और सक्रियता ही उनकी सबसे बड़ी ताकत मानी जा रही है। यही कारण है कि दो चुनावी हार के बाद भी संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच उनकी अहमियत कम नहीं हुई है। अब बोर्ड-निगम में संभावित जिम्मेदारी को लेकर क्षेत्र की सियासत में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

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