More
    Homeधर्म-समाजजब भी कोई दुःख आए देव,शास्त्र एव गुरू की शरण में जाए-आचार्य...

    जब भी कोई दुःख आए देव,शास्त्र एव गुरू की शरण में जाए-आचार्य पुलकसागर महाराज

    मुनि ओर भगवान सभी के होते है उनमें कोई भेद नहीं करना चाहिए, आचार्य पुलकसागर ससंघ के सानिध्य में सूर्यमहल में चातुर्मासिक प्रवचन

    भीलवाड़ा। साधु संत सभी सम्मानीय होते है उनमें कोई छोटा बड़ा नहीं होता। किसी में गुण कुछ कम कुछ ज्यादा हो सकते लेकिन कम गुण वाले को नकली नहीं कहा जा सकता। तीर्थंकर परमात्मा ने किसी में कोई भेद नहीं किया तो हम उनमें भेद करने वाले कौन होते है। भगवान ने संतों में तुलना करने का कोई अधिकार नहीं दिया है। इस दुनिया में कोई परफेक्ट नहीं है, किसी के चरित्र में कुछ कमी रह जाए तो उसे चरित्रहीन नहीं कहा जा सकता।

    ये विचार श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट, मैन सेक्टर शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से भीलवाड़ा में पहली बार चातुर्मास कर रहे राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागरजी महाराज ने शास्त्रीनगर स्थित सूर्यमहल में बुधवार को चातुर्मासिक प्रवचन में व्यक्त किए।

    उन्होंने कहा कि संत हमेशा आपके गुरू रहेंगे ओर मोक्ष तो प्रयास करने पर ही मिलता है। तीर्थंकर भगवान भी कई भव करके मोक्ष गए थे। हम भी लगे रहेंगे तो कभी न कभी सफलता मिल सकती है। याद रखे हर हीरो कभी जीरो होता है।

    आचार्यश्री ने कहा कि पंचम काल के मुनियों से तीर्थंकरों जैसी अपेक्षा नहीं रख सकते यदि वह वैसे हो जाते तो मोक्ष नहीं चले जाते। गलतियां साधुओं से भी होती है लेकिन वह मुनि थे ओर मुनि ही रहेंगे। साधु के पास सभी आकर अपना दुःख सुनाते है। गुरू ये बोल दे कि मैं हूं ना तो शिष्य ओर श्रावक को संबल प्राप्त होता है। कोई व्यक्ति ये बोले कि मैं हूं ना तो ये अवश्य देखे कि वह मात्र बोल रहा है या भीतर से भी साथ है।

    उन्होंने कहा कि जीवन में जब भी कोई दुःख या संकट आए देव,शास्त्र एव गुरू की शरण में जाए। दुःख दूर करना गुरू का कर्तव्य होता है। जो दुःख में साथ दे वहीं हमारा गुरू होता है। उसे तस्वीर में नहीं तकलीफ में साथ देने वाला होना चाहिए।

    आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि मेरा सौभाग्य है कि मुझे पूज्य आचार्य पुष्पदंतसागर महाराज जैसा गुरू मिले। संत भी इसी समाज से बनते है तो संसार की कमजोरियों का असर उन पर भी होता है लेकिन उनके पास छुपाने के लिए कुछ भी नहीं होता है। कमरें में पर्दे चल जाएंगे लेकिन जिंदगी में पर्दे नहीं होना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि मुनि ओर भगवान सभी के होते है उनमें कोई भेद नहीं करना चाहिए। ये अफसोस की बात है कि अजैन हमे जैन मुनि मानते है ओर जो जैनी है वह हमारे-तुम्हारे महाराज करते है। जैन समाज का उज्जवल भविष्य तभी होगा जब हम सभी मुनियों को अपना मानेंगे ओर एक समान सम्मान देंगे। पंचम काल में शुद्धोपयोगी नहीं शुभोपयोगी संत है। जो मुनि उसी भव में मोक्ष जा रहे थे वह सारे वनवासी साधु थे जबकि इस काल में सारे साधु चैत्यवासी है।

    आचार्यश्री ने कहा कि साधु उस सोने के समान है जिसकी कीमत कभी नहीं घटती। संत सोने का फूटा घड़ा हो तो भी उसकी कीमत मिट्टी के घड़े रूपी व्यक्ति से कई गुणा होगी। हमारा मकसद श्रावक श्राविकाओं के मन में मुनियों के प्रति आस्था व श्रद्धा भाव मजबूत करना है। हमे तोड़ने का नहीं जोड़ने का काम करना है।

    श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी ने बताया कि आचार्य पुलकसागर महाराज के सानिध्य में पर्युषण (दशलक्षण) पर्व की साधना 16 से 25 सितम्बर तक सूर्यमहल में होगी। इस अवधि में दस दिवसीय पाप नाशनम शिविर का भी आयोजन किया जाएगा। इस शिविर के लिए अब तक सैकड़ो श्रावक श्राविकाएं पंजीयन करा चुके है।

    प्रवचन के शुरू में दीप प्रज्वलन,पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट का सौभाग्य संजय, अनिरूद्ध एवं अरिंजय बड़जात्या परिवार ने प्राप्त किया। चातुर्मास समिति के संयोजक मनीष शाह एवं सह संयोजक लोकेश अजमेरा ने बताया कि प्रतिदिन चातुर्मासिक प्रवचन सुबह 8.30 से 10 बजे तक सूर्यमहल में हो रहे है। शाम 7 से 8 बजे तक आनंद यात्रा एवं आरती का आयोजन किया जा रहा है जिसमें भी शहर के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु शामिल होकर लाभ प्राप्त कर रहे है।

    मिशनसच न्यूज के लेटेस्ट अपडेट पाने के लिए हमारे व्हाट्सप्प ग्रुप को जॉइन करें।
    https://chat.whatsapp.com/JX13MOGfl1tJUvBmQFDvB1

    अन्य खबरों के लिए देखें मिशनसच नेटवर्क

    https://missionsach.com/category/india

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here