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    92 साल के CNR राव को क्यों बुलाया गया सुनवाई में? वोटर लिस्ट की छोटी गलती बनी बड़ी वजह

    नई दिल्ली: देश के जाने-माने वैज्ञानिक और भारत रत्न से सम्मानित 92 वर्षीय प्रोफेसर सीएनआर राव को कर्नाटक में चलाए जा रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत नोटिस जारी किया गया है। नोटिस के अनुसार, उन्हें अपनी नागरिकता और मतदाता पहचान की पुष्टि के लिए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। गौरतलब है कि यह प्रशासनिक प्रक्रिया किसी बड़े विवाद के कारण नहीं, बल्कि उनके नाम में दर्ज एक मामूली स्पेलिंग त्रुटि की वजह से शुरू हुई है।

    2002 की वोटर लिस्ट और वर्तमान रिकॉर्ड में स्पेलिंग का अंतर

    एसआईआर (SIR) जांच प्रक्रिया के दौरान प्रो. राव के मतदाता रिकॉर्ड में विसंगति पाई गई। वर्ष 2002 की वोटर लिस्ट में उनका नाम 'प्रोफेसर सी एन आर राव' पंजीकृत था, जबकि वर्तमान मतदाता सूची में लिपिकीय त्रुटि (टाइपिंग मिस्टेक) के कारण नाम 'प्रोफेसर सी एन एफ राव' दर्ज हो गया है। चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक, जब पुराने और नए डेटा में कोई भिन्नता पाई जाती है, तो सत्यापन के लिए संबंधित व्यक्ति का भौतिक रूप से उपस्थित होना अनिवार्य होता है।

    मल्लेश्वरम में सुनवाई स्थल, प्रतिनिधि भेजने पर पाबंदी

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस प्रशासनिक सुनवाई का आयोजन बंगलूरू के मल्लेश्वरम स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) के समीप रखा गया है। नियमों के तहत नोटिस प्राप्त करने वाले नागरिक को ही स्वयं उपस्थित होना होता है, और किसी भी प्रतिनिधि या परिवार के सदस्य को सत्यापन प्रक्रिया पूरी करने का अधिकार नहीं दिया गया है। इसी कारण 92 वर्ष की उम्र में प्रो. राव को स्वयं उपस्थित होने का नोटिस दिया गया है।

    वर्ष 2014 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से हुए थे अलंकृत

    प्रोफेसर सीएनआर राव भारत के अग्रणी रसायनशास्त्रियों में से एक हैं, जिन्हें विज्ञान के क्षेत्र में उनके अप्रतिम योगदान के लिए वर्ष 2014 में 'भारत रत्न' से विभूषित किया गया था। वे इस सर्वोच्च सम्मान को प्राप्त करने वाले देश के तीसरे वैज्ञानिक हैं। इतनी बड़ी हस्ती और वयोवृद्ध वैज्ञानिक को प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत भौतिक उपस्थिति का नोटिस जारी होना स्थानीय स्तर पर काफी चर्चा का विषय बन गया है।

    नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन के मामले से तुलना

    उल्लेखनीय है कि इसी पुनरीक्षण अभियान के दौरान अर्थशास्त्री और नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन का नाम भी मतदाता सूची में स्पेलिंग की गड़बड़ी के कारण जांच के दायरे में आया था। हालांकि, निर्वाचन आयोग ने उनके मामले में संवेदनशीलता दिखाते हुए उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने से छूट प्रदान की थी। वहीं, प्रो. सीएनआर राव के मामले में फिलहाल व्यक्तिगत उपस्थिति का निर्देश ही प्रभावी दिख रहा है।

    क्या है एसआईआर (SIR) प्रक्रिया और नोटिस की वजह?

    विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का मुख्य उद्देश्य वोटर लिस्ट को त्रुटिरहित और अद्यतन बनाना है। इस प्रक्रिया में यदि पुराने अभिलेखों और वर्तमान प्रविष्टियों के बीच अक्षरों या स्पेलिंग का बेमेल (mismatch) मिलता है, तो वोटर पहचान सत्यापित करने के लिए नोटिस जारी किया जाता है। आयोग का कहना है कि यह एक सामान्य और तकनीकी प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य मतदाता रिकॉर्ड की शुद्धता सुनिश्चित करना है।

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