छात्राओं ने कॉमिक्स प्रदर्शनी में जानी संस्कृति और चुनौतियां, साइबर सुरक्षा के प्रति भी किया जागरूक
अलवर। गौरी देवी राजकीय महिला महाविद्यालय में सोमवार को घुमंतू समुदायों की पहचान, संस्कृति, जीवनशैली और रोजमर्रा की समस्याओं पर आधारित ग्रासरूट्स कॉमिक्स प्रदर्शनी आयोजित की गई। वर्ल्ड कॉमिक्स इंडिया की ओर से आयोजित इस प्रदर्शनी में घुमंतू समुदायों के सदस्यों द्वारा स्वयं तैयार की गई 50 से अधिक कॉमिक्स प्रदर्शित की गईं। इनके माध्यम से छात्राओं को इन समुदायों के जीवन, संघर्ष, सामाजिक परिस्थितियों और साइबर सुरक्षा जैसे विषयों के बारे में जानने का अवसर मिला।
प्रदर्शनी में प्रस्तुत कॉमिक्स की खास बात यह रही कि इनमें घुमंतू समुदायों के लोगों ने अपने अनुभवों और चुनौतियों को कहानियों तथा चित्रों के माध्यम से व्यक्त किया। इन रचनाओं में उनकी संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं को सामने रखा गया।
चित्रों और कहानियों से समझा घुमंतू जीवन
प्रदर्शनी देखने पहुंची महाविद्यालय की छात्राओं ने कॉमिक्स के माध्यम से घुमंतू समुदायों की जीवनशैली और उनके सामने आने वाली चुनौतियों को समझा। छात्राओं के अनुसार, इस पहल ने उन्हें इन समुदायों के अनुभवों को करीब से जानने और उनकी सामाजिक परिस्थितियों के प्रति संवेदनशील बनने का अवसर दिया।
कॉमिक्स में समुदाय के सदस्यों के अपने अनुभव शामिल होने से उनकी बात को सीधे समझने का अवसर मिला। चित्रों और सरल कहानियों के जरिए सामाजिक मुद्दों को प्रस्तुत करने का यह तरीका छात्राओं के लिए जानकारीपूर्ण रहा।
साइबर सुरक्षा पर भी दिया जागरूकता का संदेश
प्रदर्शनी का उद्देश्य केवल घुमंतू समुदायों की संस्कृति और समस्याओं को सामने लाना ही नहीं, बल्कि साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी था। इस पहल के माध्यम से सामाजिक विषयों को रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत करने के साथ डिजिटल सुरक्षा के महत्व की ओर भी ध्यान आकर्षित किया गया।
प्राचार्य ने की पहल की सराहना
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर (डॉ.) सत्यभान यादव ने वर्ल्ड कॉमिक्स इंडिया के कॉमिक्स अभियान की सराहना की। उन्होंने कहा कि कॉमिक्स के माध्यम से घुमंतू समुदायों की पहचान और उनसे जुड़े मुद्दों को सामने लाना सराहनीय पहल है।
वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद मलिक भी प्रदर्शनी में उपस्थित रहे। उन्होंने इसे सामाजिक मुद्दों को रचनात्मक तरीके से आम चर्चा में लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
प्रदर्शनी के माध्यम से छात्राओं को यह समझने का अवसर मिला कि चित्रकथाएं केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि इनके जरिए समुदायों के अनुभव, सामाजिक चुनौतियां और उनकी पहचान भी व्यापक समाज तक पहुंचाई जा सकती हैं।
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