जयपुर के गायत्री नगर दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित सिद्धचक्र महामंडल विधान का भव्य समापन मुनि श्री पावन सागर जी महाराज के सान्निध्य में हुआ। विश्व शांति व जीव कल्याण हेतु महायज्ञ, श्रीजी की पालकी शोभायात्रा और भक्तिमय वातावरण में सम्पन्न हुआ यह पवित्र आध्यात्मिक आयोजन।
मिशनसच न्यूज, जयपुर।
दिगंबर जैन मंदिर प्रबंध समिति, गायत्री नगर (महारानी फार्म), जयपुर के तत्वावधान में और श्री आदिनाथ महिला मंडल के सहयोग से आयोजित सिद्धचक्र महामंडल विधान का भव्य समापन विश्व शांति एवं जीव कल्याण के महायज्ञ के साथ संपन्न हुआ। यह अनुष्ठान परम पूज्य मुनि श्री पावन सागर जी महाराज एवं मुनि श्री सुभद्र सागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में 29 अक्टूबर से आरंभ होकर 5 नवम्बर 2025 को संपन्न हुआ।
सुबह 7:30 बजे सोधर्म इन्द्र-इन्द्राणी सुनील और अनीता रावका (बयाना वाले) परिवार द्वारा शांतिधारा के साथ सिद्धों की आराधना प्रारंभ हुई। इस दौरान समस्त इन्द्र-इन्द्राणियों ने सिद्धों के गुणों की भक्ति भाव से स्तुति करते हुए कुल 2042 अर्घ्य चढ़ाए। तत्पश्चात महायज्ञ नायक उदयभान जैन, अनीता बड़जात्या और सभी इन्द्र-इन्द्राणियों ने विश्व शांति और जीव कल्याण हेतु महायज्ञ किया।
अनुष्ठान के उपरांत श्रीजी की पालकी शोभायात्रा पूरे हर्षोल्लास के साथ निकाली गई। मंगल कलश, वाद्य यंत्रों और भक्ति गीतों के साथ यह यात्रा मंदिर परिसर तक पहुंची, जहां श्रीजी का कलशाभिषेक संपन्न हुआ और वेदी पर विराजमान किया गया। वातावरण “जय जय श्री आदिनाथ प्रभु” के जयघोषों से गूंज उठा।
मुनि श्री पावन सागर जी महाराज के मंगल प्रवचन
अपने मंगल आशीर्वचन में पूज्य मुनि श्री पावन सागर जी महाराज ने कहा कि “जैन दर्शन में सिद्धचक्र महामंडल विधान एक अत्यंत पवित्र, शक्तिशाली और आध्यात्मिक अनुष्ठान माना गया है। इसका उद्देश्य आत्मा को शुद्ध करना और ज्ञात-अज्ञात पापों का प्रायश्चित करना है। श्रद्धा और भक्ति से किया गया यह विधान जीवन भर के पापों का क्षय करता है और साधक को आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करता है।”
उन्होंने बताया कि यह विधान विशेष रूप से अष्टान्हिका महापर्व — कार्तिक, फाल्गुन और आषाढ़ मास में आयोजित किया जाता है, जिससे साधक की आत्मा और अधिक निर्मल होती है।
सम्मान और सहयोग
विधानाचार्य पंडित अजित शास्त्री द्वारा सभी मांगलिक क्रियाएं पूर्ण कराई गईं।
अभिषेक का सौभाग्य प्रदीप बाकलीवाल को प्राप्त हुआ, जबकि श्रीजी की पालकी उठाने का पुण्य कार्य सुभाष बज, अनिल टोंग्या, अनिल गदिया और विजय सोगानी को मिला।
चंवर ढुलाने का सौभाग्य महिमा अजमेरा, अनिल और रेखा झांझरी को प्राप्त हुआ।
इस अवसर पर आदिनाथ महिला मंडल की प्रचार मंत्री अनीता बड़जात्या ने बताया कि सोधर्म इन्द्र-इन्द्राणी रावका परिवार के साथ सहयोगी इन्द्र-इन्द्राणी अरुण-ज्योति और प्रमिला शाह परिवार का स्वागत समिति पदाधिकारियों — बीना टोंग्या, अनिल टोंग्या, निर्मल सेठी, अनिल गदिया, सारसमल-पदम झांझरी, एडवोकेट विमल जैन बाकलीवाल, अशोक कुमार जैन कासलीवाल, अशोक कुमार जैन विधानसभा आदि द्वारा किया गया।
विधानाचार्य पंडित अजित शास्त्री का सम्मान मंदिर प्रबंध समिति और महिला मंडल द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
समापन अवसर पर बीना टोंग्या ने सभी सहयोगी भक्तों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन अरुण शाह (उपाध्यक्ष) ने किया।


