देहरा तिजारा में ज्ञान को कषायों से मुक्त रख आत्मशुद्धि का किया आह्वान
देहरा तिजारा। अतिशय क्षेत्र देहरा तिजारा में विराजमान परम पूज्य भावलिंगी संत श्रमणाचार्य 108 श्री विमर्शसागर जी महाराज ससंघ ने अपने मंगल प्रवचन में ज्ञान की पवित्रता, आत्मशुद्धि तथा प्रत्येक वस्तु में विद्यमान गुणों का अत्यंत गूढ़ एवं प्रेरणादायी विवेचन किया। उन्होंने श्रद्धालुओं को आत्मकल्याण के मार्ग पर अग्रसर होने के लिए अपने ज्ञान को कषायों से मुक्त रखने का संदेश दिया।

आचार्य श्री ने कहा कि संसारी जीव को अपने ज्ञान को निरंतर निर्मल बनाने का प्रयास करना चाहिए। जो व्यक्ति अपने ज्ञान को शुद्ध करता है, वह वास्तव में अपनी आत्मा को शुद्ध करता है, जबकि जो अपने ज्ञान को मलिन करता है, वह अपनी आत्मा को भी मलिन कर लेता है।
कषायों से युक्त ज्ञान नहीं रह सकता शुद्ध
प्रवचन के दौरान आचार्य श्री ने कहा कि यदि ज्ञान राग, द्वेष, क्रोध, मान, माया और लोभ जैसी कषायों से प्रभावित हो जाए, तो उसकी पवित्रता नष्ट हो जाती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि जिस प्रकार स्वच्छ वस्त्र कीचड़ के संपर्क में आने पर मलिन हो जाता है, उसी प्रकार कषायों के संपर्क में आया ज्ञान भी अपनी निर्मलता खो देता है।
उन्होंने आगे कहा कि यदि वस्त्र कीचड़ से दूर रहे तो वह स्वच्छ बना रहता है। इसी प्रकार यदि आत्मा का ज्ञान राग-द्वेष और कषायों से अलग रहे, तो उसकी शुद्धता सदैव अक्षुण्ण रहती है। इसलिए प्रत्येक साधक को आत्मचिंतन एवं संयम के माध्यम से अपने ज्ञान की पवित्रता बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए।
हर द्रव्य में विद्यमान हैं गुण
आचार्य विमर्शसागर जी महाराज ने कहा कि संसार में ऐसी कोई भी वस्तु नहीं है जिसमें कोई गुण न हो। प्रत्येक द्रव्य अपने स्वाभाविक गुणों से युक्त होता है। आवश्यकता केवल उन गुणों को सम्यक दृष्टि से पहचानने और उनका सदुपयोग करने की है।
उन्होंने कहा कि जब मनुष्य बाहरी वस्तुओं के गुणों के साथ-साथ अपने आत्मगुणों को भी पहचानता और जागृत करता है, तभी उसका जीवन सार्थक, शांतिमय और कल्याणकारी बनता है।
संयम और आत्मचिंतन से जीवन बनेगा सफल
प्रवचन के समापन पर आचार्य श्री ने सभी श्रद्धालुओं से संयम, आत्मचिंतन, सम्यक ज्ञान तथा आत्मगुणों के विकास के माध्यम से जीवन को सफल बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आत्मकल्याण का मार्ग भीतर की शुद्धता से होकर गुजरता है।
प्रवचन के उपरांत श्रद्धालुओं ने गुरुदेव के ओजस्वी एवं आत्मकल्याणकारी संदेश का श्रवण कर धर्मभावना को और अधिक दृढ़ किया।
इस अवसर पर देहरा जैन मंदिर अध्यक्ष मुकेश जैन, नरेंद्र जैन, चातुर्मास समिति अध्यक्ष सुरेश जैन (पटेल), प्रचार मंत्री उमंग जैन, अक्षत जैन, आरव जैन, संयम जैन, यथार्थ जैन, चिराग जैन (सीए), सुरेंद्र जैन (सुररू), प्रथम जैन, राकेश जैन (मामू), राहुल जैन सहित बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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