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    ज्ञान गंगा महोत्सव में आचार्य पुलकसागर का संदेश, ‘इंडिया’ की जगह गर्व से ‘भारत’ बोलने का किया आह्वान

    चित्रकूटधाम में चातुर्मास महोत्सव का भव्य आगाज, राष्ट्रभक्ति प्रस्तुतियों से गूंजा पंडाल; आचार्य बोले- अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं पर गर्व जरूरी

    भीलवाड़ा। धर्मनगरी भीलवाड़ा में श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर ट्रस्ट, मुख्य सेक्टर शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगंबर जैन समाज की ओर से पहली बार चातुर्मास कर रहे राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागर महाराज के सानिध्य में ज्ञान गंगा महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। 30 अगस्त तक चलने वाले इस महोत्सव की शुरुआत 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर नगर निगम के चित्रकूटधाम में जश्ने आजादी कार्यक्रम के साथ हुई।

    करीब तीन घंटे चले कार्यक्रम में आचार्य पुलकसागर महाराज ने राष्ट्रभक्ति, भाषा, संस्कृति और भारतीय परंपराओं को लेकर प्रेरणादायी उद्बोधन दिया। वहीं देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने वातावरण को राष्ट्रभक्ति के रंग में रंग दिया। पहले ही दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु कार्यक्रम में शामिल हुए।

    ‘भारत’ नाम पर गर्व करने का किया आह्वान

    स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आचार्य पुलकसागर महाराज ने देश के नाम, भाषा और संस्कृति को लेकर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी देश को ‘इंडिया’ कहने की प्रवृत्ति पर विचार करने की आवश्यकता है। उन्होंने ‘इंडिया’ शब्द को गुलामी की स्मृति से जोड़ते हुए लोगों से गर्व के साथ ‘भारत’ कहने का आह्वान किया।

    आचार्य ने कहा कि भारत नाम ऋषभदेव पुत्र भरत, शकुंतला पुत्र भरत और दशरथ पुत्र भरत जैसी भारतीय परंपराओं की स्मृति से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि देशवासियों को अपने देश के नाम, भाषा, सभ्यता, संस्कृति, वेशभूषा और रीति-रिवाजों पर गर्व करना चाहिए।

    भाषा के विषय में आचार्य पुलकसागर ने हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाए जाने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि देश में विभिन्न भारतीय भाषाएं हैं और सभी भाषाओं का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने हिंदी को लोगों के रिश्तों और दिलों की भाषा बताते हुए इसके व्यापक सम्मान की आवश्यकता जताई।

    तथ्यात्मक रूप से, भारतीय संविधान में हिंदी संघ की राजभाषा है; संविधान में किसी भाषा को ‘राष्ट्रभाषा’ घोषित नहीं किया गया है। आचार्य का हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा देने का बयान उनके संबोधन के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

    संस्कृति और परंपराओं को अपनाने पर जोर

    आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि जिस समाज को अपनी संस्कृति, परंपराओं और रीति-रिवाजों पर गर्व नहीं होता, उसके सामने सांस्कृतिक पहचान कमजोर होने का खतरा रहता है। उन्होंने भारतीय पर्वों और परंपराओं को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

    उन्होंने भारत की सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए रामनवमी, रक्षाबंधन, दीपावली और महावीर जयंती जैसे पर्वों को श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाने की बात कही।

    कश्मीर को लेकर भी दिया संदेश

    आचार्य पुलकसागर महाराज ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2019 में इसके हटने के बाद कश्मीर को वास्तविक अर्थों में भारत के साथ जोड़ने की प्रक्रिया मजबूत हुई। उन्होंने कहा कि कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और देश की एकता एवं अखंडता सर्वोपरि है।

    उन्होंने वर्तमान भारत की सामरिक स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत किसी को छेड़ता नहीं है, लेकिन चुनौती मिलने पर अपनी सुरक्षा और सम्मान की रक्षा करना जानता है।

    दस समूहों ने दी राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत प्रस्तुतियां

    जश्ने आजादी कार्यक्रम में दस समूहों ने राष्ट्रभक्ति की भावना से जुड़ी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। प्रस्तुतियों के दौरान पूरा पंडाल भारत माता की जय और जय हिंद के उद्घोष से गूंज उठा।

    प्रतियोगिता में संभव ग्रुप ने प्रथम, भारत की बेटियां ग्रुप ने द्वितीय तथा आजादी की वीरांगना ग्रुप ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। विजेता समूहों को चातुर्मास समिति की ओर से नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।

    कार्यक्रम की शुरुआत ध्वजारोहण से हुई, जो सांसद दामोदर अग्रवाल ने किया। आचार्य पुलकसागर महाराज का पाद प्रक्षालन एवं श्रीफल समर्पित कर अभिनंदन भाजपा जिलाध्यक्ष प्रशांत मेवाड़ा और पूर्व विधायक विट्ठलशंकर अवस्थी ने किया।

    अतिथियों का स्वागत श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी, संयोजक मनीष शाह और सह संयोजक लोकेश अजमेरा सहित पदाधिकारियों ने किया। संचालन समिति के महामंत्री जयकुमार पाटनी ने किया।

    उपमुख्यमंत्री बैरवा ने किए आचार्य के दर्शन

    राजस्थान के उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने शनिवार दोपहर सूर्यमहल पहुंचकर वहां विराजित राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागर महाराज के दर्शन किए और आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान उन्होंने आचार्यश्री से विभिन्न विषयों पर धर्म चर्चा भी की।

    ‘प्रेम को जीवन का महामंत्र बनाएं’

    ज्ञान गंगा महोत्सव के अगले सत्र में रविवार सुबह आचार्य पुलकसागर महाराज ने जीवन में प्रेम और पारिवारिक सद्भाव के महत्व पर प्रवचन दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवन में सुविधाएं बढ़ने के बावजूद परिवारों में सुख-शांति की कमी दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि घर को सुखी और आनंदमय बनाने के लिए प्रेम को जीवन का आधार बनाना जरूरी है।

    आचार्य ने कहा कि प्रेम की भाषा हर जीव समझता है और परिवार में परस्पर प्रेम एवं समझदारी का वातावरण होना चाहिए। उन्होंने परिवार के सदस्यों से नियमित रूप से साथ बैठकर भोजन करने और एक-दूसरे के साथ संवाद बढ़ाने का आह्वान किया।

    प्रवचन से पूर्व दीप प्रज्ज्वलन, पाद प्रक्षालन और शास्त्र भेंट का सौभाग्य श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के सदस्यों को मिला। इनमें अध्यक्ष प्रवीण चौधरी, संयोजक मनीष शाह, सह संयोजक लोकेश अजमेरा और महामंत्री जयकुमार पाटनी शामिल रहे।

    दिल्ली से आए हंसकुमार जैन और दीपेश जैन तथा इंदौर के नेमीचंद जैन का भी समिति की ओर से स्वागत किया गया। श्री पार्श्वनाथ महिला मंडल की सदस्यों ने स्वागत नृत्य प्रस्तुत किया।

    30 अगस्त तक होंगे प्रवचन

    ज्ञान गंगा महोत्सव के तहत 30 अगस्त तक प्रतिदिन सुबह 8:30 से 10 बजे तक चित्रकूटधाम में प्रवचन होंगे। इसके अलावा शाम 7 से 8 बजे तक आनंद यात्रा और आरती का आयोजन किया जा रहा है। इसमें शहर के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु शामिल होकर धार्मिक आयोजन का लाभ ले रहे हैं।

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