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    डांगावास फैसले पर पीयूसीएल का बड़ा प्रहार, उच्च न्यायालय में अपील की मांग

    विशेष न्यायालय के निर्णय पर प्रहार, पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए कानूनी लड़ाई तेज करने की अपील

    जयपुर। पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) राजस्थान ने नागौर जिले के डांगावास में वर्ष 2015 में हुई जातीय हिंसा और सामूहिक हत्याकांड से जुड़े मामले में विशेष न्यायालय, मेड़ता द्वारा 5 अगस्त 2026 को दिए गए निर्णय पर गहरी चिंता और निराशा व्यक्त की है। संगठन ने राज्य सरकार और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से निर्णय का विधिक परीक्षण कर उच्च न्यायालय में शीघ्र अपील दायर करने की मांग की है।

    प्रेस बयान में पीयूसीएल ने कहा कि यह मामला अनुसूचित जाति के मेघवाल समुदाय पर कथित सुनियोजित हिंसा, आगजनी, महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार, भूमि से बेदखली तथा कई लोगों की हत्या के आरोपों से जुड़ा था। संगठन के अनुसार इस मामले में 40 आरोपियों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मुकदमा चलाया गया था।

    न्याय व्यवस्था पर उठाए सवाल

    पीयूसीएल ने अपने बयान में कहा कि यदि व्यापक जांच, सीबीआई की विवेचना, प्रत्यक्षदर्शी गवाहों, चिकित्सीय साक्ष्यों और दस्तावेजी प्रमाणों के बावजूद पीड़ित पक्ष स्वयं को न्याय से वंचित महसूस करता है, तो यह आपराधिक न्याय व्यवस्था की प्रभावशीलता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

    संगठन का कहना है कि इससे दलित समुदाय में यह संदेश जा सकता है कि संगठित जातीय हिंसा के मामलों में न्याय प्राप्त करना कठिन है।

    अपील और कानूनी सहायता की मांग

    पीयूसीएल ने कहा कि न्यायिक निर्णयों की संवैधानिक और तथ्यात्मक समीक्षा लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिक समाज का वैध अधिकार है। यदि पीड़ित पक्ष निर्णय से असंतुष्ट है, तो उसे उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में अपील करने का अधिकार है।

    संगठन ने राज्य सरकार और सीबीआई से मांग की है कि मामले का गहन विधिक परीक्षण कर तत्काल उच्च न्यायालय में अपील दायर की जाए। साथ ही पीड़ित परिवारों को प्रभावी कानूनी सहायता, सुरक्षा और पुनर्वास उपलब्ध कराया जाए।

    पीड़ित परिवारों के साथ एकजुटता जताई

    प्रेस बयान में पीयूसीएल राजस्थान ने पीड़ित परिवारों के साथ अपनी एकजुटता व्यक्त करते हुए न्याय की लड़ाई में उनके साथ खड़े रहने की प्रतिबद्धता दोहराई।

    यह प्रेस बयान पीयूसीएल की राष्ट्रीय अध्यक्ष कविता श्रीवास्तव, राष्ट्रीय सचिव भंवर मेघवंशी, प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अनंत भटनागर तथा प्रदेश महासचिव डॉ. राजेश चौधरी और प्रज्ञा जोशी की ओर से जारी किया गया।

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