विधानसभा में राजस्थान के कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने दी जानकारी, खंडेला में 540 किसानों को अनुदान
जयपुर। कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने सोमवार को विधानसभा में कहा कि तारबंदी योजना के तहत किसानों की लागत कम करने के लिए राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर नियमों में शिथिलता दी गई है।
नियमों में किए गए प्रमुख बदलाव
कृषि मंत्री ने बताया कि पहले हर 10 फीट पर पोल गाड़ने का नियम था, जिसे बढ़ाकर 15 फीट कर दिया गया है। इसी प्रकार 6 तारों और 2 क्रॉस वायर के स्थान पर अब 5 वायर मान्य किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि पहले हर दसवें पोल पर सपोर्ट पोल लगाने का प्रावधान था, जिसे अब पंद्रहवें पोल तक बढ़ा दिया गया है। इसके अलावा पोल पर फाउंडेशन की अनिवार्यता में छूट दी गई है तथा चेन लिंक जाली के स्थान पर नोटेड जाली लगाने पर भी अनुदान दिया जा रहा है।
खंडेला क्षेत्र में आवेदन और अनुदान की स्थिति
प्रश्नकाल के दौरान विधायक सुभाष मील द्वारा पूछे गए पूरक प्रश्न के उत्तर में मंत्री ने बताया कि खंडेला विधानसभा क्षेत्र में वर्ष 2017-18 से 2025-26 (10 फरवरी 2026 तक) कुल 4482 कृषकों ने आवेदन प्रस्तुत किए।
इनमें से नियमानुसार कार्य पूर्ण करने वाले 540 कृषकों को 150.18 लाख रुपये का अनुदान उपलब्ध करवाया गया है, जबकि 1190 कृषकों की पत्रावलियां प्रक्रियाधीन हैं। निर्धारित मापदंड पूरे नहीं करने के कारण शेष किसानों को पात्र नहीं माना गया।
अपात्रता के प्रमुख कारण
कृषि मंत्री ने बताया कि कई मामलों में खसरा क्षेत्रफल कम होना, खसरा नंबर एक परिधि में नहीं होना, प्री-वेरिफिकेशन से पहले ही तारबंदी पाई जाना, समूह आवंटन में सहमति नहीं होना, आवेदक की मृत्यु, आर्थिक स्थिति कमजोर होना अथवा खेत में फसल होने के कारण तारबंदी संभव नहीं होना जैसे कारणों से आवेदन अपात्र पाए गए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार वित्तीय अनुकूलता के आधार पर अनुदान राशि बढ़ाने पर भी विचार कर सकती है।
अनुदान का प्रावधान
तारबंदी कार्यक्रम के तहत 400 रनिंग मीटर तक:
लघु व सीमांत कृषकों को 60% या अधिकतम 48 हजार रुपये
सामान्य कृषकों को 50% या अधिकतम 40 हजार रुपये
सामुदायिक स्तर पर 70% या अधिकतम 56 हजार रुपये
वनाधिकार पट्टा धारक कृषकों को 90% या अधिकतम 72 हजार रुपये (जो भी कम हो)
400 रनिंग मीटर से कम परिधि में तारबंदी करने पर प्रोरेटा आधार पर अनुदान दिया जाता है।
मंत्री ने बताया कि योजना के अंतर्गत आवेदनों का निस्तारण “पहले आओ, पहले पाओ” के आधार पर किया जाता है। विभिन्न स्तरों पर लंबित पत्रावलियां आगामी वर्षों में उसी स्तर पर शामिल की जाती हैं और पात्रता पूर्ण करने वाले किसानों को जिले की वरीयता के आधार पर अनुदान स्वीकृत किया जाता है।
मिशनसच न्यूज के लेटेस्ट अपडेट पाने के लिए हमारे व्हाट्सप्प ग्रुप को जॉइन करें।
https://chat.whatsapp.com/JX13MOGfl1tJUvBmQFDvB1
अन्य खबरों के लिए देखें मिशनसच नेटवर्क


