अतिक्रमण हटाने के लिए नोटिस जारी, वर्षाकाल से पहले जल भराव व बहाव क्षेत्र होगा साफ
जयपुर। जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने शुक्रवार को विधानसभा में कहा कि भीलवाड़ा जिले के पांसल और समोडी तालाब में अतिक्रमण कर मलबा डालने के मामले को गंभीरता से लिया गया है। इस संबंध में विभागीय अधिकारियों ने संबंधित लीजधारी को नोटिस जारी किए हैं और जिला कलेक्टर भीलवाड़ा को भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
मंत्री रावत ने आश्वस्त किया कि आगामी वर्षाकाल से पहले ही तालाबों के भराव और बहाव क्षेत्र से अतिक्रमण हटा दिया जाएगा, ताकि जल प्रवाह में किसी प्रकार की बाधा न रहे और तालाब अपनी क्षमता के अनुसार भर सकें।
हाईकोर्ट के आदेश पर बनी समिति कर रही निगरानी
उन्होंने बताया कि जल प्रवाह क्षेत्र में अवरोधों को हटाने के लिए राजस्थान उच्च न्यायालय के आदेश के तहत प्रशासनिक सुधार विभाग द्वारा जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई है।
इस समिति में जल संसाधन विभाग के अधिकारी भी शामिल हैं, जो तालाबों और जल स्रोतों के जल ग्रहण क्षेत्र में आने वाले अवरोधों की निगरानी और कार्रवाई कर रहे हैं।
200 तालाबों का 300 करोड़ से होगा जीर्णोद्धार
प्रश्नकाल के दौरान विधायक उदयलाल भडाणा द्वारा पूछे गए पूरक प्रश्नों के जवाब में मंत्री रावत ने बताया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के मार्गदर्शन में बजट वर्ष 2026-27 के तहत पंचायती राज विभाग से जल संसाधन विभाग में आए छोटे बांधों और तालाबों का जीर्णोद्धार कराया जाएगा।
उन्होंने बताया कि 200 तालाबों का चरणबद्ध तरीके से लगभग 300 करोड़ रुपये की लागत से जीर्णोद्धार कराया जाएगा।
भीलवाड़ा जिले के सुरास, पांसल और समोडी तालाब उन तालाबों में शामिल हैं, जिन्हें पहले पंचायती राज विभाग को हस्तांतरित किया गया था।
मानसून 2025 में इतना भरा था तालाब
विधायक भडाणा के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में जल संसाधन मंत्री ने बताया कि मानसून वर्ष 2025 के दौरान—
पांसल तालाब 10 फीट के पूर्ण जल भराव गेज तक भरा
सुरास तालाब 5.70 फीट के विरुद्ध 5.00 फीट तक भरा
समोडी तालाब 7 फीट के विरुद्ध 5 फीट तक भरा
उन्होंने बताया कि सुरास तालाब के जल ग्रहण क्षेत्र में कोई अवरोध नहीं पाया गया, जबकि पांसल और समोडी तालाब के जल ग्रहण व जल भराव क्षेत्र में अवरोधों का विवरण सदन के पटल पर रखा गया है।
मंत्री ने कहा कि इन अवरोधों को हटाने के लिए नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा रही है, ताकि जल स्रोतों का संरक्षण सुनिश्चित हो सके।
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