खाद्य सुरक्षा का खैरथल-तिजारा में मिलावट पर बड़ा वार, मिठाई-मावा से लेकर घी-दूध तक के सैंपल
किशनगढ़बास । रक्षाबंधन का त्योहार नजदीक आते ही खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिलावट के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। खैरथल और तिजारा क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा टीम ने विभिन्न दुकानों और डेयरी प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई करते हुए कलाकंद, देसी घी, मिश्रित दूध, बर्फी और मावा के नमूने लिए। सभी सैंपल जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं।

खाद्य सुरक्षा अधिकारी हेमंत कुमार यादव के नेतृत्व में हुई कार्रवाई सीएमएचओ डॉ. अरविंद गेट के निर्देश पर की गई। टीम ने प्रतिष्ठान संचालकों को खाद्य सामग्री की गुणवत्ता बनाए रखने, साफ-सफाई रखने और खाद्य सुरक्षा कानूनों की पालना करने की हिदायत भी दी।
खैरथल-तिजारा में इन प्रतिष्ठानों से लिए सैंपल
कार्रवाई के दौरान खैरथल स्थित मैसर्स विजय डेयरी रीको से कलाकंद और देसी घी के नमूने लिए गए। वहीं सखी डेयरी से मिश्रित दूध का सैंपल लिया गया। तिजारा में भगत जी मिष्ठान से बर्फी तथा जाहिद डेयरी से मावा का नमूना जांच के लिए लिया गया।
विभाग की ओर से कार्रवाई को जनहित में बताया गया है। त्योहार के दौरान बड़ी मात्रा में मिठाई और दूध से बने उत्पादों की बिक्री को देखते हुए खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
लेकिन जनता का सवाल—रोज बिकने वाले सामान की जांच रोज क्यों नहीं?
कार्रवाई के बीच एक सवाल लगातार उठ रहा है—अगर मिठाई, दूध, घी और मावा रोज बिकते हैं और लोग इन्हें रोज खाते हैं, तो खाद्य पदार्थों की जांच सिर्फ रक्षाबंधन, दीपावली या होली जैसे त्योहारों के आसपास ही क्यों तेज होती है?
त्योहारों पर खाद्य पदार्थों की शुद्धता सुनिश्चित करना जरूरी है, लेकिन आम लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा से जुड़े विभाग की निगरानी पूरे साल लगातार होनी चाहिए। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक बड़ी संख्या में लोग रोज दूध, मावा, घी और मिठाइयों का सेवन करते हैं।
ऐसे में सवाल यह भी है कि यदि विभाग नियमित रूप से दुकानों का निरीक्षण करे और समय-समय पर सैंपलिंग की जाए तो त्योहारों से पहले अचानक विशेष अभियान चलाने की जरूरत कितनी रह जाएगी?
जनता के तीन बड़े सवाल
पहला सवाल: मिठाई, दूध और घी रोज बिकते हैं और बच्चे भी इन्हें रोज खाते हैं, तो क्या सिर्फ त्योहारों के दौरान ही मिलावट का खतरा बढ़ता है?
दूसरा सवाल: क्या खाद्य सुरक्षा टीम की सक्रियता त्योहारों से कुछ दिन पहले शुरू होने के बजाय पूरे साल नियमित नहीं होनी चाहिए?
तीसरा सवाल: त्योहारों के दौरान कार्रवाई और सैंपलिंग बढ़ने के पीछे नियमित निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत पर भी क्या विभाग को ध्यान नहीं देना चाहिए?
लोगों का कहना है कि खाद्य सुरक्षा केवल त्योहारों तक सीमित विषय नहीं है। यदि पूरे साल नियमित निरीक्षण, सैंपलिंग और कार्रवाई होती रहे तो मिलावटखोरी पर स्थायी रूप से अंकुश लगाया जा सकता है।
365 दिन निगरानी होगी तभी सार्थक होगा अभियान
मिलावट के खिलाफ कार्रवाई का उद्देश्य केवल त्योहारों के दौरान बाजार को नियंत्रित करना नहीं, बल्कि आम लोगों को पूरे वर्ष सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना होना चाहिए। स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी भी केवल त्योहारों के आसपास सक्रिय होने तक सीमित नहीं रह सकती।
जनता की अपेक्षा है कि खाद्य सुरक्षा विभाग खैरथल-तिजारा क्षेत्र में 12 महीने नियमित जांच और सैंपलिंग की व्यवस्था को मजबूत करे। इससे न केवल मिलावट पर प्रभावी रोक लगेगी, बल्कि उपभोक्ताओं का खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर भरोसा भी बढ़ेगा।
रक्षाबंधन पर मिठाई की शुद्धता जरूरी है, लेकिन सवाल यह भी है कि जो खाद्य सामग्री रक्षाबंधन पर जांची जा रही है, उसकी गुणवत्ता की निगरानी बाकी दिनों में कौन करेगा? यही सवाल खाद्य सुरक्षा व्यवस्था की निरंतरता और प्रभावशीलता पर सबसे बड़ा सवाल खड़ा करता है।
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