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    सोडावास में पार्थेनियम घास के खिलाफ जागरूकता अभियान, 58 ग्रामीणों ने समझे खतरे और बचाव के उपाय

    कृषि विज्ञान केंद्र गुंता में विशेषज्ञों ने बताए पार्थेनियम घास के दुष्प्रभाव, सुरक्षित नियंत्रण के तरीके भी समझाए

    सोडावास। कृषि विज्ञान केंद्र, गुंता में पार्थेनियम घास (कांग्रेस घास) के दुष्प्रभाव और इसके प्रभावी प्रबंधन को लेकर ग्रामीण समुदाय में जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन केंद्र के प्रसार विशेषज्ञ डॉ. संदीप कुमार रस्तोगी ने केंद्र अध्यक्ष के मार्गदर्शन में किया। कार्यक्रम में ग्रामीण युवाओं सहित कुल 58 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

    कार्यक्रम का मुख्य विषय पार्थेनियम घास का मानव स्वास्थ्य, पशुधन एवं कृषि पर प्रभाव तथा इसके प्रभावी प्रबंधन के प्रति ग्रामीण समुदाय में जागरूकता रहा। इस दौरान ग्रामीणों को पार्थेनियम की पहचान, इसके दुष्प्रभाव, रोकथाम और सुरक्षित नियंत्रण के वैज्ञानिक उपायों की जानकारी दी गई।

    खेतों से लेकर खाली जमीन तक तेजी से फैलता है पार्थेनियम

    डॉ. संदीप कुमार रस्तोगी ने बताया कि पार्थेनियम एक तेजी से फैलने वाला हानिकारक खरपतवार है, जो खेतों, सड़क किनारे, खाली भूमि, चारागाह और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर आसानी से उग जाता है। इसके फैलाव से फसलों की उत्पादकता प्रभावित होने के साथ-साथ जैव विविधता और प्राकृतिक वनस्पतियों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

    उन्होंने ग्रामीणों को बताया कि पार्थेनियम के परागकण और पौधे के अन्य हिस्सों के संपर्क में आने से त्वचा संबंधी एलर्जी, खुजली और लाल चकत्ते जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा संवेदनशील लोगों में श्वसन संबंधी परेशानी भी उत्पन्न हो सकती है। पशुओं द्वारा इसके अधिक सेवन से भी उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

    सुरक्षा के साथ करें कांग्रेस घास का नियंत्रण

    कार्यक्रम में ग्रामीणों को विशेष रूप से पार्थेनियम घास को हटाते समय सुरक्षा उपाय अपनाने की सलाह दी गई। बताया गया कि इसे हाथ से हटाने की स्थिति में दस्ताने, मास्क और अन्य आवश्यक सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए, ताकि पौधे के संपर्क से होने वाले दुष्प्रभावों से बचा जा सके।

    प्रतिभागियों को पार्थेनियम के जैविक एवं यांत्रिक नियंत्रण के साथ आवश्यकता के अनुसार वैज्ञानिक खरपतवार प्रबंधन उपायों की भी जानकारी दी गई। ग्रामीणों को समझाया गया कि समय रहते नियंत्रण करने से इसके अनियंत्रित प्रसार को रोका जा सकता है।

    ग्रामीणों ने पूछे सवाल, सामूहिक प्रयास पर बनी सहमति

    जागरूकता कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने पार्थेनियम घास से जुड़ी विभिन्न समस्याओं और इसके नियंत्रण के व्यावहारिक उपायों पर चर्चा की। ग्रामीणों ने विशेषज्ञ से अपने सवाल पूछे और उनके समाधान की जानकारी प्राप्त की।

    प्रतिभागियों ने गांव स्तर पर पार्थेनियम नियंत्रण के लिए सामूहिक प्रयास करने की आवश्यकता पर भी सहमति जताई। कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि केवल व्यक्तिगत स्तर पर नियंत्रण करने के बजाय सामुदायिक स्तर पर लगातार अभियान चलाने से इसके प्रसार को प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है।

    कार्यक्रम के समापन पर डॉ. संदीप कुमार रस्तोगी ने ग्रामीण समुदाय से आह्वान किया कि पार्थेनियम घास को केवल सामान्य खरपतवार न समझें, बल्कि मानव स्वास्थ्य, पशुधन, फसल उत्पादन और पर्यावरण के लिए संभावित समस्या के रूप में देखते हुए इसके नियंत्रण के लिए निरंतर प्रयास करें।

    कार्यक्रम का संदेश रहा— पार्थेनियम हटाएं – स्वास्थ्य बचाएं, फसल बचाएं और पर्यावरण सुरक्षित बनाएं।

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