आचार्य ज्ञान भूषण महाराज ने दिया अतिथि सत्कार का संदेश, जैन संत के विश्राम के लिए बनेगा निवास
अलवर। दिगंबर जैन संत आचार्य ज्ञान भूषण जी महाराज ने कहा कि जीवन में दान की संस्कृति को कभी नहीं भूलना चाहिए। भारतीय संस्कृति में अतिथि को देवता के समान माना गया है, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार दान देने और जरूरतमंदों की सहायता करने में पीछे नहीं हटना चाहिए। वे बुधवार को अलवर के समीप घासोली में दिगंबर जैन आचार्य शांतिसागर संत निवास के शिलान्यास समारोह को संबोधित कर रहे थे।
आचार्य श्री ने कहा कि पहले घरों के बाहर अतिथि देवो भव का संदेश दिखाई देता था, लेकिन आज कई जगह कुत्तों से सावधान जैसे संदेश नजर आते हैं। उन्होंने इसे बदलती सामाजिक सोच का उदाहरण बताते हुए कहा कि लोगों को अपनी सांस्कृतिक परंपराओं, अतिथि सत्कार और मानवीय मूल्यों को बनाए रखना चाहिए।
जैन संतों को मिलेगा विश्राम का स्थान
आचार्य ज्ञान भूषण महाराज ने संत निवास के निर्माण को जैन साधु-साध्वियों के लिए उपयोगी पहल बताया। उन्होंने कहा कि किशनगढ़ से अलवर की ओर विहार करते हुए आने वाले जैन संतों और साध्वियों को रास्ते में रात्रि विश्राम के लिए उचित स्थान नहीं मिल पाता था।
संत भवन बनने से उन्हें विश्राम करने के साथ धर्म प्रभावना का अवसर भी मिलेगा। इस तरह यह भवन धार्मिक गतिविधियों और संतों की सुविधाओं के लिहाज से महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
ध्वजारोहण और मंगलाचरण से हुई शुरुआत
शिलान्यास समारोह की शुरुआत ध्वजारोहण के साथ हुई। इसके बाद मंगलाचरण प्रस्तुत किया गया। समाजसेवी एवं श्री आदिनाथ जैन शिक्षण संस्थान के अध्यक्ष अशोक जैन अगोनीज ने आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन किया। श्रद्धालुओं ने शास्त्र भेंट किए। कार्यक्रम में दीप प्रज्ज्वलन और चित्र अनावरण सहित विभिन्न धार्मिक आयोजन भी हुए।
मंत्रोच्चार के बीच जैन संत भवन की आधारशिला रखी गई। इस दौरान परिसर जयकारों से गूंज उठा। कार्यक्रम में अलवर के साथ विभिन्न स्थानों से आए श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
भूमि दान करने वाले परिवारों का सम्मान
संत निवास के निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध कराने वाले कमलेश जैन, पुनीषत जैन, प्रवीण जैन, पुनीत जैन और सुशील अग्रवाल परिवार सहित समाज के विभिन्न प्रतिष्ठित लोगों का सम्मान किया गया।
समारोह के दौरान बारिश भी हुई, जिससे उपस्थित श्रद्धालुओं को गर्मी से राहत मिली। धार्मिक वातावरण के बीच संपन्न हुए इस आयोजन में दान, सेवा, अतिथि सत्कार और संतों के प्रति श्रद्धा का संदेश दिया गया।
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