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    दिल्ली सीएम पर हमले के मामले में हाईकोर्ट सख्त, आरोपियों की दलीलों पर उठे सवाल

    सुनवाई में हमले केस को लेकर कोर्ट ने गंभीरता जताई, आरोपियों ने धाराओं को चुनौती दी

    नई दिल्ली। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर हुए हमले के मामले में शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। यह सुनवाई मामले के आरोपी राजेशभाई और तहसीन रजा शेख की याचिकाओं पर हुई, जिनमें उन्होंने निचली अदालत द्वारा लगाए गए हत्या के प्रयास और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर आरोपों को चुनौती दी है। मामले की सुनवाई अनूप जयराम भंभानी की पीठ के समक्ष हुई, जहां दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क रखे।

    सुनवाई के दौरान आरोपियों के वकीलों ने कहा कि उनके मुवक्किलों के खिलाफ हत्या के प्रयास और साजिश जैसे आरोप लगाने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं। उन्होंने दलील दी कि मेडिकल रिपोर्ट में चोट सामान्य बताई गई है, जिससे जान लेने की मंशा साबित नहीं होती। वकीलों ने यह भी कहा कि एफआईआर में शुरुआत में हत्या के प्रयास की धारा शामिल नहीं थी, बल्कि इसे बाद में चार्जशीट में जोड़ा गया। साथ ही उन्होंने यह भी तर्क दिया कि गला दबाने जैसी कोई घटना नहीं हुई और सुरक्षाकर्मियों ने भी ऐसा कोई आरोप नहीं लगाया है।

    सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामले को हल्के में नहीं लिया जा सकता। जस्टिस भंभानी ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति की जुगुलर नस पर हल्का दबाव भी डाला जाए, तो वह जानलेवा हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि मामला उतना सरल नहीं है जितना बचाव पक्ष पेश करने की कोशिश कर रहा है और इसमें सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच जरूरी है।

    तहसीन रजा शेख के वकील ने कोर्ट में कहा कि उनके मुवक्किल को बेवजह फंसाया गया है। उन्होंने बताया कि तहसीन घटना के समय मौके पर मौजूद नहीं था और उसे केवल इसलिए आरोपी बनाया गया क्योंकि उसने मुख्य आरोपी को 2000 रुपये भेजे थे। वकील के अनुसार इतनी छोटी राशि को साजिश से जोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि तहसीन को घटना के चार दिन बाद राजकोट से गिरफ्तार किया गया था।

    यह घटना 20 अगस्त 2025 की है, जब मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता अपने सरकारी आवास पर जनसुनवाई कर रही थीं। इसी दौरान एक व्यक्ति ने उन पर अचानक हमला कर दिया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत आरोपी को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया।

    जांच के दौरान एक अन्य व्यक्ति का नाम भी सामने आया, जिसे साजिश के आरोप में जोड़ा गया। दोनों आरोपियों के खिलाफ हत्या के प्रयास, आपराधिक साजिश और सरकारी कार्य में बाधा डालने जैसी धाराओं में मामला दर्ज किया गया।

    इस मामले में तीस हजारी कोर्ट पहले ही दोनों आरोपियों के खिलाफ गंभीर आरोप तय कर चुका है। 20 दिसंबर को दिए गए फैसले में अदालत ने कहा था कि प्रथम दृष्टया आरोपियों के खिलाफ मामला बनता है।

    अब हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को अपनी-अपनी दलीलें लिखित रूप में प्रस्तुत करने के लिए सोमवार तक का समय दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 15 अप्रैल को होगी।

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