विकास में सीएसआर की भूमिका पर दिया जोर, भरतपुर-डीग के उद्यमी और प्रगतिशील किसान हुए शामिल
मिशनसच न्यूज, भरतपुर। इंडिया सीएसआर नेटवर्क संस्था द्वारा 17वीं इंडिया सीएसआर लीडरशिप समिट का आयोजन नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में किया गया। समिट में भरतपुर के समृद्ध भारत अभियान के निदेशक सीताराम गुप्ता मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। इस दौरान भरतपुर व डीग जिलों के 10 सफल उद्यमी एवं प्रगतिशील किसान भी विशेष रूप से शामिल हुए। कार्यक्रम में देशभर से औद्योगिक समूहों के प्रमुख, नीति-निर्माता, सरकारी अधिकारी, गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि, सामाजिक नवप्रवर्तक एवं ग्रामीण विकास से जुड़े विचारक मौजूद रहे।
समिट में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए सीताराम गुप्ता ने आकांक्षी जिलों एवं ब्लॉकों को विकसित भारत की आधारशिला बताया। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सरकार के साथ-साथ औद्योगिक घरानों की सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) राशि का ऐसा सदुपयोग होना चाहिए, जिससे पंक्ति के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक विकास की किरण पहुंचे। उन्होंने सीएसआर फाउंडेशनों के प्रतिनिधियों से अपील की कि वे आकांक्षी जिलों व ब्लॉकों की योजनाओं में सरकार के साथ समन्वय बनाकर कार्य करें, ताकि संसाधनों का बेहतर और प्रभावी उपयोग हो सके।
गुप्ता ने आकांक्षी जिलों व ब्लॉकों के विकास पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि ग्रामीण विकास और गरीबी उन्मूलन के लिए सीएसआर की नीतियों एवं कार्यक्रमों में ऐसे बदलाव जरूरी हैं, जिनसे सकारात्मक और स्थायी परिणाम सामने आएं। यदि सीएसआर आधारित योजनाएं परिवार की आय, कौशल शिक्षा और स्वास्थ्य पर केंद्रित हों, तभी विकास का मूल मॉडल अधिक सशक्त बन सकता है।
उन्होंने डीग जिले के कुम्हेर ब्लॉक का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां सुनियोजित विकास मॉडल के तहत पुलिस प्रशिक्षण केंद्र, विश्वविद्यालय, कृषि महाविद्यालय एवं कृषि अनुसंधान केंद्र की स्थापना से क्षेत्र को नई गति मिली है। उन्होंने कहा कि समृद्ध भारत अभियान संस्था द्वारा गरीबी उन्मूलन, ग्रामीण विकास, युवाओं और महिलाओं को स्वरोजगार उपलब्ध कराने हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर विशेष ध्यान दिया गया, जिससे बेरोजगारी की समस्या का काफी हद तक समाधान हुआ है।
समिट में सीएसआर नेटवर्क के प्रमुख रुसेन कुमार ने कहा कि यह समिट केवल विचार-विमर्श का मंच नहीं, बल्कि साझेदारी, नवाचार और ठोस कार्य योजनाओं की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि सीएसआर को खर्च की गई राशि से नहीं, बल्कि उससे प्राप्त परिणामों से मापा जाना चाहिए।
बक्सर (बिहार) के सांसद सुधाकर सिंह ने कहा कि आकांक्षी जिलों व ब्लॉकों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, कौशल विकास, आजीविका, महिला सशक्तिकरण और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में अधिक कार्य करने की आवश्यकता है। वहीं आईआईएफसीएल के प्रबंध निदेशक पलास श्रीवास्तव ने कहा कि यदि सीएसआर राशि का व्यय विशेषज्ञों के निर्देशन में किया जाए, तो इसके बेहतर और दूरगामी परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।
कार्यक्रम में पूर्व सांसद प्रदीप गांधी, भारत फोर्ज की डॉ. लीना देशपांडे, डॉ. सुशील भालचंद्र, भूमिका जैन, अनुराधा पाटिल, सतीश झा, डॉ. भास्कर चटर्जी, अनिल महतो, डॉ. नीलम गुप्ता, फिरोज सिद्दीकी, अरुण अरोड़ा, डॉ. बनिता वादेया, रेहमा खान सहित अनेक वक्ताओं ने अपने विचार रखे। इस अवसर पर उत्कृष्ट सीएसआर संस्थाओं एवं परियोजनाओं के संचालकों को पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया गया।
समिट में भरतपुर व डीग जिलों से शामिल होने वाले उद्यमी एवं प्रगतिशील किसानों में बावेन के गोपाल ठाकुर, नैवाडा के मधुमक्खीपालक शिव सिंह, वैर के अमरुद उत्पादक रामेश्वर धाकड़, छौकरबाड़ा के प्राकृतिक खेती करने वाले किसान प्रेम सिंह, हलैना के कृषक पथ प्रदर्शक विष्णु मित्तल तथा पाली (नदबई) के पशुपालक गोपाल सोलंकी प्रमुख रूप से शामिल रहे।
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