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    नकली नोट पर ‘मेड इन इंडिया’ की मुहर, दाऊद इब्राहिम के गुर्गों की नई चाल

    सख्ती के बाद बदली नकली नोट पर रणनीति, ड्रोन और छोटे ठिकानों से फैलाया जा रहा जाल

    नकली नोट पहले पहले पाकिस्तान से आते थे, फिर सरहद पर मुस्तैदी बढ़ने के बाद बांग्लादेश के रास्ते घुसने लगे। लेकिन जब दोनों दरवाजे बंद होने लगे, तो दाऊद इब्राहिम के गुर्गों ने नई राह निकाली। वह यह था कि अब नकली नोट भारत के अंदर ही छापो, छोटे-छोटे ठिकानों पर, और चुपचाप बाजार में उतार दो।खुफिया एजेंसियों ने हाल के महीनों में नकली नोटों की बरामदगी में जो बढ़ोतरी देखी है, वो इसी बदली हुई रणनीति की तरफ इशारा करती है।

    सरहद पर शिकंजा कसा तो बदल ली चाल
    पहले यह गिरोह पाकिस्तान और बांग्लादेश की सीमा के रास्ते नकली नोट भारत में धकेलता था। लेकिन बीएसएफ की सख्ती और सीमा पर बढ़ी निगरानी ने यह काम मुश्किल कर दिया।अब इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक अधिकारी के मुताबिक गिरोह ने अपने भारत में बैठे ऑपरेटिवों को साफ निर्देश दे दिए हैं कि खुद छापो, कम छापो, लेकिन लगातार छापते रहो।गिरोह जा यह भी निर्देश है कि एक जगह ज्यादा देर मत रुको, बेस बदलते रहो और मात्रा कम रखो ताकि नजर न पड़े। यही नई कार्यप्रणाली है जो एजेंसियों को मिली जानकारी से सामने आई है।

    मालदा वाला मॉडल फेल हुआ
    पश्चिम बंगाल के मालदा में एक वक्त इस गिरोह की पूरी फैक्ट्री चलती थी। वहां इतने असली जैसे नकली नोट बनते थे कि पहचानना मुश्किल था। लेकिन एनआईए और दूसरी एजेंसियों ने जब वहां कार्रवाई तेज की, तो वो यूनिट तकरीबन बर्बाद हो गई। अधिकारियों के मुताबिक मालदा की छपाई क्षमता आधे से भी नीचे आ गई है। अब गिरोह एक जगह पर निर्भर नहीं रहना चाहता। गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और पंजाब में नई यूनिटें खड़ी करने की कोशिश हो रही है। खबर है कि कच्चा माल भेजने की तैयारी भी चल रही है। अगर यह माल ऑपरेटिवों तक पहुंच गया, तो उत्पादन फिर बढ़ सकता है।

    ड्रोन से नोट गिराने की कोशिश भी जारी
    जिस तरह पाकिस्तान की तरफ से ड्रोन के जरिए हथियार और ड्रग्स भेजे जाते हैं, अब उसी रास्ते नकली नोट भेजने की कोशिश भी सामने आ रही है। पिछले महीने बीएसएफ और अमृतसर पुलिस ने ढाई लाख रुपये के नकली नोट पकड़े। अधिकारियों का मानना है कि यह एक तरह का ट्रायल रन था, देखना था कि यह तरीका काम करता है या नहीं। छोटे और हल्के पैकेट भेजे जा रहे हैं ताकि रडार और निगरानी सिस्टम पर कम दिखें। एजेंसियों का कहना है कि भले ही देश के अंदर छपाई बढ़ रही हो, ड्रोन का इस्तेमाल भी बंद नहीं होगा।

    मकसद सिर्फ पैसा नहीं, अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचाना है
    एजेंसियों के मुताबिक इस पूरी कवायद के पीछे दो मकसद हैं। पहला- आतंकी गतिविधियों के लिए फंड जुटाना। दूसरा- बाजार में नकली नोट फैलाकर भारतीय अर्थव्यवस्था को कमजोर करना। यह कोई छोटे-मोटे ठगों का काम नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति है जो पाकिस्तान में बैठकर चलाई जा रही है।

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