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    नये श्रम कानूनों से भविष्य की नौकरियों का स्वरूप बदलेगा: अनिल कौशिक

    नये श्रम कानूनों में नौकरियां सीमित समय के लिए ही मिलेगी

    मिशनसच न्यूज,   भिवाड़ी। नये श्रम कानून भविष्य की कार्य पद्धति, कार्यस्थलों की संरचना तथा कर्मचारियों के काम करने के तरीकों में व्यापक बदलाव लाएंगे। आने वाले समय में स्थायी प्रकृति की नौकरियां लगभग समाप्त होने की संभावना है और अधिकतर कर्मचारियों को नियत अवधि के लिए ही नियोजित किया जाएगा। यह बात प्रबंध एवं श्रम कानून विशेषज्ञ अनिल कौशिक ने कही।

    वे भिवाड़ी में स्कूल ऑफ मैनेजमेंट स्किल्स द्वारा आयोजित उद्योगों के प्रशिक्षण कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में उन्होंने हाल ही में लागू किए गए चार लेबर कोड, जिनमें 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को समाहित किया गया है, के प्रावधानों, प्रभावों और अनुपालना पर विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर वे एनसीआर क्षेत्र के उद्योगों के एचआर प्रबंधकों को श्रम कानूनों में हुए परिवर्तनों के व्यावहारिक पहलुओं से अवगत करा रहे थे।

    अनिल कौशिक ने कहा कि नए श्रम कानूनों में वेतन की परिभाषा को अनावश्यक रूप से संशलिष्ट बना दिया गया है, हालांकि इससे कर्मचारियों को दीर्घकाल में लाभ होगा। नई वेतन परिभाषा के तहत कर्मचारियों को ग्रेच्युटी, प्रोविडेंट फंड और ईएसआई में अधिक लाभ मिलेगा। इसके साथ ही पहली बार नियत अवधि के लिए नियोजित कर्मचारियों को भी एक वर्ष की सेवा पूरी होने पर ग्रेच्युटी दिए जाने का प्रावधान किया गया है, जो पहले नहीं था।

    उन्होंने बताया कि पत्रकारों के लिए ग्रेच्युटी भुगतान की सेवा अवधि को पांच वर्ष से घटाकर तीन वर्ष कर दिया गया है। इसके अलावा संस्थानों की मुख्य उत्पादन गतिविधियों में ठेका श्रमिकों के नियोजन पर प्रतिबंध लगाया गया है। 40 वर्ष से अधिक आयु के कर्मचारियों की वर्ष में एक बार नियोक्ता द्वारा निःशुल्क स्वास्थ्य जांच कराना अनिवार्य होगा। उद्योगों में अब श्रमिकों से उनकी इच्छा के विरुद्ध ओवरटाइम नहीं कराया जा सकेगा।

    नए कानूनों के तहत नौकरी छोड़ने के दो दिन के भीतर ही कर्मचारियों का संपूर्ण भुगतान नियोक्ता को करना होगा। रात्रि पाली में महिला कर्मचारियों के कार्य करने की अनुमति दी गई है, बशर्ते नियोक्ता उनकी सुरक्षा के लिए समुचित इंतजाम सुनिश्चित करे। जिन संस्थानों में श्रमिकों की केवल एक यूनियन होगी, उसे स्वतः मान्यता प्राप्त होगी और नियोक्ता को समस्याओं के समाधान के लिए उससे विमर्श करना अनिवार्य होगा। वहीं, ऐसे प्रावधान भी जोड़े गए हैं, जिनसे श्रमिक यूनियनों के लिए हड़ताल करना पहले की तुलना में अधिक कठिन हो जाएगा।

    कौशिक ने यह भी बताया कि गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा का ढांचा खड़ा करने के प्रावधान नए लेबर कोड में शामिल किए गए हैं। उनके अनुसार चारों लेबर कोड इस प्रकार बनाए गए हैं कि उद्योगों और श्रमिकों—दोनों के अधिकारों एवं कर्तव्यों के बीच संतुलन बना रहे।

    प्रशिक्षण कार्यक्रम में एनसीआर क्षेत्र के विभिन्न उद्योगों के एचआर प्रबंधकों एवं उद्योगपतियों ने भाग लिया और श्रम कानूनों से जुड़ी जिज्ञासाओं पर विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त किया।

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