बेटी के जन्म पर खुशी की मिसाल, सरकारी अस्पताल से घर पहुंचा सम्मान का संदेश
अलवर। शहर के समीप खुदनपुरी गांव के भीम नगर निवासी जतिन के घर बेटी के जन्म से खुशियों का माहौल छा गया। परिवार ने इस खुशी को यादगार बनाने के लिए नवजात बच्ची के स्वागत की विशेष तैयारी की और अस्पताल से घर लाने के लिए कार को फूलों से सजवाया।
जतिन ने बताया कि कुछ दिन पहले उनके घर बेटी का जन्म हुआ था। परिवार को जैसे ही यह खुशखबरी मिली, घर में उत्सव जैसा माहौल बन गया। परिजनों ने तय किया कि बेटी को अस्पताल से घर लाने का दिन भी विशेष तरीके से मनाया जाएगा।
शनिवार को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद मां और नवजात को घर ले जाने के लिए पूरा परिवार अस्पताल पहुंचा। फूलों से सजी कार और परिवार के सदस्यों के उत्साह को देखकर अस्पताल में मौजूद लोग भी भावुक हो उठे। कई लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायक बताया।
निजी अस्पताल में कार्यरत, फिर भी चुना सरकारी अस्पताल
विशेष बात यह रही कि जतिन स्वयं एक निजी अस्पताल में नर्सिंगकर्मी के रूप में कार्यरत हैं। इसके बावजूद उन्होंने अपनी पत्नी का प्रसव सरकारी अस्पताल में कराने का निर्णय लिया।
उन्होंने बताया कि सरकारी अस्पतालों में अब बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं। डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारियों ने पूरी संवेदनशीलता एवं जिम्मेदारी के साथ सेवाएं प्रदान कीं। इसी वजह से उन्होंने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर भरोसा जताया।
जतिन का कहना है कि बेटियां घर की लक्ष्मी होती हैं और उनका जन्म किसी उत्सव से कम नहीं होना चाहिए। यदि समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित होगी तो लिंग भेद जैसी सामाजिक बुराइयों पर भी प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।
कार देखकर अचरज में पड़ गए लोग
अस्पताल परिसर में मौजूद कई मरीजों और उनके परिजनों को शुरुआत में लगा कि कोई विशेष अतिथि या अधिकारी अस्पताल आया है। लेकिन जब उन्हें पता चला कि यह सजावट एक नवजात बच्ची के स्वागत के लिए की गई है, तो हर कोई परिवार की सोच की प्रशंसा करने लगा।
कई महिलाओं ने कहा कि पहले बेटी के जन्म पर परिवारों में मायूसी दिखाई देती थी, लेकिन अब समय बदल रहा है। आज बेटियां शिक्षा, खेल, प्रशासन, सेना और विज्ञान सहित हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रही हैं। ऐसे में बेटी के जन्म पर खुशी मनाना समाज में सकारात्मक बदलाव का संकेत है।
बदल रही है समाज की सोच
विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में बेटियों को लेकर लोगों की सोच में बड़ा परिवर्तन आया है। सरकारी योजनाओं, शिक्षा के बढ़ते स्तर और महिलाओं की उल्लेखनीय उपलब्धियों ने इस बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
अलवर के जनाना अस्पताल में देखने को मिला यह दृश्य केवल एक परिवार की खुशी नहीं था, बल्कि समाज में आ रहे सकारात्मक बदलाव का प्रतीक भी था। यह संदेश था कि बेटी का जन्म उत्सव का अवसर है, क्योंकि बेटियां किसी भी मायने में बेटों से कम नहीं हैं।
नवजात बच्ची के स्वागत में सजी कार अस्पताल से निकल गई, लेकिन वह समाज के लिए एक ऐसी प्रेरक मिसाल छोड़ गई, जो यह संदेश देती है कि जब बेटियों को समान सम्मान और अवसर मिलेंगे, तभी सच्चे अर्थों में सामाजिक विकास संभव होगा।
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