अलवर आगमन से पहले सामाजिक संगठनों ने उठाई आवाज, सरकार पर कार्रवाई में देरी का लगाया आरोप
अलवर। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 16 अगस्त को पहली बार अलवर आगमन से पहले राजस्थान में नीलगाय हत्या से जुड़े कानून को रद्द कराने की मांग उठाई गई है। सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों से जुड़े प्रबुद्ध लोगों ने संयुक्त अपील जारी कर अमित शाह से इस मामले में प्रभावी हस्तक्षेप करने की मांग की है।
संयुक्त अपील में रामगढ़ से तीन बार भाजपा विधायक रहे ज्ञानदेव आहूजा, भाजपा राजस्थान के बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष खिल्लीमल जैन, विश्व हिंदू परिषद के जिला महामंत्री विजेंद्र खंडेलवाल, सार्वजनिक गौशाला के अध्यक्ष एवं नगर परिषद के पूर्व सभापति अजय अग्रवाल, आर्य समाज के जिला प्रधान प्रदीप आर्य, राजस्थान इप्टा के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश शर्मा, बंधुआ मुक्ति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष राजेश याज्ञिक, भारतीय जनता युवा मोर्चा के पूर्व उपाध्यक्ष मुरारी पाराशर, राजस्थान किसान सभा के अध्यक्ष भोलाराम शर्मा, दाऊजी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष अनिल चौधरी, राजस्थान पुजारी महासंघ के अध्यक्ष आचार्य पंडित राजेंद्र शर्मा तथा राजस्थान नीलगाय रक्षा आंदोलन टीम के ओमप्रकाश गुप्ता सहित अन्य लोगों ने अपनी मांग रखी है।
कानून में बदलाव की मांग
अपीलकर्ताओं ने कहा कि अमित शाह हिंसा, दया, करुणा, मानवता और इंसानियत के मूल्यों के साथ सनातन संस्कृति के प्रति आस्था रखते हैं। ऐसे में उन्होंने राजस्थान में नीलगायों की हत्या से जुड़े कानून को समाप्त करने की दिशा में पहल करने की मांग की है।
उनका कहना है कि नीलगाय एक शाकाहारी वन्यजीव है और प्रकृति की धरोहर है। अन्य जीवों की तरह उसे भी प्राकृतिक रूप से जीवन जीने का अधिकार मिलना चाहिए। संगठनों ने नीलगाय संरक्षण को लेकर मौजूदा कानूनी व्यवस्था में आवश्यक बदलाव की मांग की है।
सरकार की निष्क्रियता पर जताई नाराजगी
संयुक्त अपील में आरोप लगाया गया कि राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और प्रदेश के वन मंत्री संजय शर्मा को कई सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों की ओर से ज्ञापन और मांग पत्र दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद नीलगायों की सुरक्षा को लेकर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
अपीलकर्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकारी तंत्र की कथित चुप्पी और अनदेखी के कारण प्रदेश में कुछ लोगों द्वारा नीलगायों की निर्मम हत्या कर उनके मांस की आपूर्ति किए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। उन्होंने इसे सामाजिक एवं सांस्कृतिक भावनाओं के विपरीत बताते हुए सरकार से तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की।
अमित शाह से हस्तक्षेप की उम्मीद
संगठनों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से अपील की है कि वे इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए राजस्थान सरकार और संबंधित मंत्रालयों के स्तर पर आवश्यक हस्तक्षेप करें। साथ ही नीलगायों के संरक्षण के लिए कानून में आवश्यक बदलाव की दिशा में पहल की जाए।
अपीलकर्ताओं का कहना है कि नीलगायों को संरक्षण देने की दिशा में प्रभावी कदम उठाना वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशीलता का संदेश भी देगा।
मिशनसच न्यूज के लेटेस्ट अपडेट पाने के लिए हमारे व्हाट्सप्प ग्रुप को जॉइन करें।
https://chat.whatsapp.com/JX13MOGfl1tJUvBmQFDvB1
अन्य खबरों के लिए देखें मिशनसच नेटवर्क


