महिलाओं ने किया नृत्य
मिशनसच न्यूज, अलवर, ।हरियाली तीज के पावन अवसर पर पंचवटी कॉलोनी स्थित पार्क में पंचवटी मातृशक्ति की ओर से भव्य और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध तीज कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पारंपरिक परिधान और उल्लासपूर्ण वातावरण में सजी यह शाम महिलाओं के उत्साह, एकता और सांस्कृतिक चेतना का सजीव उदाहरण बनी।
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक लोकगीतों के साथ हुई, जिसमें महिलाओं ने आपस में गले मिलकर एक-दूसरे को तीज की ढेरों शुभकामनाएं दीं। हरियाली तीज के इस विशेष पर्व को महिलाओं ने अपने पूरे उत्साह, उमंग और उल्लास के साथ मनाया। कार्यक्रम में करीब 70 महिलाओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया, जो पारंपरिक परिधान, साज-श्रृंगार और रंग-बिरंगे परिधानों में सजी-धजी थीं।
तीज के गीतों पर थिरकीं सखियां
जैसे ही डीजे पर तीज के पारंपरिक गीत बजे, महिलाओं का जोश देखते ही बनता था। लोकगीतों पर सभी सखियां झूम उठीं और एक के बाद एक प्रस्तुतियों ने माहौल को पूरी तरह तीजमय बना दिया। महिलाओं ने मिलकर गिद्दा, घूमर और गरबा जैसे नृत्य प्रस्तुत कर उत्सव को जीवंत कर दिया।
सांस्कृतिक प्रस्तुति और खेलों ने बढ़ाया आनंद
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं के लिए पारंपरिक खेलों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का भी आयोजन किया गया।
भोज और प्रसाद
कार्यक्रम के समापन पर सभी महिलाओं को प्रसाद और तीज से जुड़ी पारंपरिक मिठाइयां जैसे घेवर, फेनी और खीर वितरित की गईं। आयोजकों ने इस बात का विशेष ध्यान रखा कि कार्यक्रम में पर्यावरणीय संतुलन बना रहे, इसलिए प्लास्टिक का प्रयोग नहीं किया गया और स्थानीय महिलाओं द्वारा तैयार की गई सजावट सामग्री का उपयोग किया गया।
संस्था की संयोजिका का संदेश
कार्यक्रम की संयोजिका ने सभी महिलाओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि, “हरियाली तीज केवल एक पर्व नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का अवसर है। यह महिलाओं के आपसी स्नेह, सहयोग और शक्ति का प्रतीक है। भविष्य में भी पंचवटी मातृशक्ति इस प्रकार के आयोजन करती रहेगी ताकि हमारी परंपराएं और संस्कृति अगली पीढ़ी तक सुरक्षित रहें।”
समापन पर एकजुटता और सौहार्द का संदेश
समारोह का समापन सभी महिलाओं द्वारा मिलकर ‘तीज मंगल गीत’ गाने और एकसाथ हर्षोल्लास के साथ नृत्य करते हुए हुआ। कार्यक्रम ने यह सिद्ध कर दिया कि जब नारी शक्ति एकत्र होती है, तो वह हर आयोजन को जीवंत, संजीव और प्रेरणादायक बना सकती है।
इस कार्यक्रम ने एक ओर जहां पारंपरिक पर्व की गरिमा को बनाए रखा, वहीं महिलाओं के बीच सौहार्द और सांस्कृतिक चेतना को भी मजबूती से आगे बढ़ाया।
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