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    Homeराजस्थानअलवरपहाड़ों के बीच करणी माता मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब

    पहाड़ों के बीच करणी माता मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब

    अष्टमी पर श्रद्धालुओं की कतारें, जयकारों से गूंजा माता का दरबार

    अलवर। नवरात्र की अष्टमी के पावन अवसर पर अलवर के बाला किला क्षेत्र में पहाड़ियों के बीच स्थित करणी माता मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। सुबह से ही माता के दर्शन के लिए भक्तों के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। मंदिर परिसर में लगी कतारों और गूंजते जयकारों के बीच पूरा वातावरण भक्तिमय नजर आया।

    दूर-दराज के क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। कोई परिवार के साथ दरबार में पहुंचा, तो कोई मनोकामना लेकर माता के चरणों में शीश नवाने आया। अष्टमी के अवसर पर मंदिर में श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था।

    सुबह से दर्शन के लिए पहुंचते रहे भक्त

    मंदिर के महंत उमेश शर्मा ने बताया कि अष्टमी पर करणी माता के दरबार में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। सुबह से ही भक्तों का तांता लगा हुआ है और दूर-दूर से आने वाले लोगों में दर्शन को लेकर विशेष उत्साह दिखाई दे रहा है। श्रद्धालु पूरी श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना कर रहे हैं।

    ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व रखता है मंदिर

    अलवर के बाला किला क्षेत्र में स्थित करणी माता मंदिर शहर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, मंदिर का निर्माण अलवर रियासत के महाराजा बख्तावर सिंह ने 1792 से 1815 के बीच करवाया था। मान्यता है कि उनकी मनोकामना पूरी होने के बाद उन्होंने माता के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए मंदिर का निर्माण कराया।

    तभी से यह मंदिर क्षेत्र के प्रमुख आस्था केंद्रों में गिना जाता है। नवरात्र के दौरान यहां विशेष रौनक रहती है और नौ दिनों तक चलने वाले मेले में राजस्थान सहित हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और अन्य राज्यों से श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

    मन्नत के धागे और चुनरी बांधने की परंपरा

    श्रद्धालु करणी माता के दरबार में पूजा-अर्चना कर अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की प्रार्थना करते हैं। मान्यता पूरी होने पर कई भक्त दोबारा मंदिर पहुंचकर माता के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। मंदिर परिसर और आसपास मन्नत के धागे तथा चुनरी बांधने की परंपरा भी श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी हुई है।

    सुरक्षा व्यवस्था पर प्रशासन की नजर

    मेले में श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन की ओर से व्यवस्था बनाए रखने के इंतजाम किए गए हैं। सरिस्का के जंगलों में वन्यजीवों की मौजूदगी को ध्यान में रखते हुए श्रद्धालुओं से निर्धारित मार्गों पर चलने और जंगल के भीतर नहीं जाने की अपील की गई है।

    अष्टमी पर करणी माता मंदिर में उमड़ी भीड़ अलवर की धार्मिक परंपरा और माता के प्रति लोगों की अटूट आस्था को दर्शाती है। पहाड़ियों की शांत वादियों में गूंजते जयकारों के बीच मंदिर परिसर में दिनभर भक्तिमय माहौल बना रहा।

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