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    पीएम-कुसुम योजना से अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा, किसान बन रहे ऊर्जा उत्पादक

    पीएम-कुसुम योजना के तहत सौर संयंत्र और सोलर पंप से किसानों की आय बढ़ाने के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी मिल रहा प्रोत्साहन

    अलवर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शिता के परिणामस्वरूप केंद्र सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाअभियान (पीएम-कुसुम योजना) के माध्यम से देशभर में अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित हो रहे हैं। इस योजना का उद्देश्य किसानों को ऊर्जा और जल सुरक्षा प्रदान करना, उनकी आय में वृद्धि करना, कृषि क्षेत्र को डीजल मुक्त बनाना तथा पर्यावरण प्रदूषण को कम करना है।

    नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय भारत सरकार द्वारा वर्ष 2019 से संचालित इस योजना को राजस्थान में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है। योजना किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और कृषि क्षेत्र को स्वच्छ ऊर्जा से जोड़ने का सशक्त माध्यम बन रही है।

    घटक-ए : सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापना

    पीएम-कुसुम योजना के घटक-ए के तहत किसान अपनी भूमि पर 0.5 मेगावाट से 2 मेगावाट क्षमता तक के विकेंद्रीकृत ग्राउंड या स्टिल्ट माउंटेड ग्रिड कनेक्टेड सोलर अथवा अन्य नवीकरणीय ऊर्जा आधारित पावर प्लांट स्थापित कर सकते हैं। किसान यह संयंत्र स्वयं, समूह, सहकारी समितियों, पंचायतों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) या डेवलपर के माध्यम से भी लगा सकते हैं।

    इन संयंत्रों से उत्पन्न बिजली को डिस्कॉम द्वारा तय दर पर खरीदा जाता है। यदि किसान अपनी भूमि डेवलपर को पट्टे पर देते हैं तो उन्हें लीज रेंट का लाभ भी मिलता है। अलवर वृत में कुसुम योजना के तहत अब तक कुल 98 पीपीए हुए हैं, जिनमें से 6 सौर ऊर्जा संयंत्र टहला, रेनी, चिरखाना, इंदरगढ़, चिकानी और ऊंटवाल में चालू हो चुके हैं, जबकि अन्य संयंत्रों का कार्य प्रगति पर है।

    घटक-बी : सोलर कृषि पंप

    कुसुम योजना के घटक-बी के अंतर्गत किसान सिंचाई के लिए स्टैंड-अलोन सोलर एग्रीकल्चर पंप स्थापित कर सकते हैं। इसके तहत 7.5 एचपी क्षमता तक के सौर ऊर्जा पंप संयंत्र 60 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराए जाते हैं। इसके लिए किसान के पास स्वयं के स्वामित्व में कम से कम 0.4 हेक्टेयर भूमि होना आवश्यक है।

    अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के किसानों को राज्य योजना के तहत प्रति संयंत्र 45 हजार रुपए का अतिरिक्त अनुदान भी दिया जाता है। यह योजना विशेष रूप से उन किसानों के लिए लाभकारी है जिनके पास सिंचाई के लिए विद्युत कनेक्शन नहीं है और जो डीजल पंप या अन्य साधनों पर निर्भर हैं।

    घटक-सी : पंपों का सोलराइजेशन

    कुसुम योजना के घटक-सी के तहत ग्रिड से जुड़े कृषि पंपों के सोलराइजेशन और फीडर लेवल सोलराइजेशन को बढ़ावा दिया जाता है। इसके तहत 7.5 एचपी तक के कृषि पंप सेटों पर सोलर पैनल लगाकर किसान अपनी खेती के लिए बिजली का उपयोग करने के साथ अतिरिक्त बिजली को बिजली कंपनी को बेचकर अतिरिक्त आय भी अर्जित कर सकते हैं।

    सरकार इस घटक के तहत किसानों को केंद्रीय वित्तीय सहायता प्रदान करती है, जिससे उन्हें दिन के समय सुनिश्चित सौर ऊर्जा उपलब्ध हो सके। अलवर वृत में इस घटक के तहत अब तक 23 पीपीए हुए हैं, जिनमें से 3 सौर ऊर्जा संयंत्र बालेटा, चिकानी और नंगला सेडू में शुरू हो चुके हैं और शेष संयंत्रों का कार्य जारी है।

    अधिक जानकारी के लिए

    योजना से संबंधित अधिक जानकारी के लिए नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट www.mnre.gov.in पर विजिट किया जा सकता है या टोल फ्री नंबर 1800-180-3333 पर संपर्क किया जा सकता है।

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