शिविर में बढ़ी जागरूकता: मानव-वन्यजीव संघर्ष पर दो दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित
किशनगढ़ बास। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा ‘मानव-वन्यजीव संघर्ष’ विषय पर दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव रनवीर सिंह की अध्यक्षता में संपन्न हुआ, जिसका उद्देश्य पैनल अधिवक्ताओं और पैरा लीगल वॉलंटियर्स (पीएलवी) को पीड़ितों की प्रभावी सहायता और कानूनी प्रक्रियाओं की जानकारी देना था।
रनवीर सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं केवल आंकड़े नहीं, बल्कि एक गंभीर मानवीय त्रासदी हैं, जिनसे गरीब किसान और वन-आश्रित समुदाय सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। उन्होंने कहा कि विधिक कर्मी समाज के अंतिम व्यक्ति की आवाज बनें और केवल औपचारिकता तक सीमित न रहें।
उन्होंने निर्देश दिए कि विधिक कर्मी घटनास्थल पर पहुंचकर पीड़ितों को चिकित्सा सहायता दिलाने, आवश्यक दस्तावेज तैयार कराने और मुआवजा दिलाने तक उनके साथ खड़े रहें। यह भी कहा गया कि संवेदनशील व्यवहार के साथ पीड़ितों की हर संभव मदद सुनिश्चित की जाए।
प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों ने उपयोगी जानकारियां साझा कीं। वन विभाग के रेंजर मनीष ने बताया कि 24 से 72 घंटे के भीतर पंचनामा तैयार करना जरूरी है, ताकि मुआवजा प्रक्रिया में देरी न हो। पुलिस विभाग से हेड कांस्टेबल विजय ने एफआईआर और साक्ष्य संग्रहण की तकनीकी जानकारी दी, जबकि नायब तहसीलदार हिमांशु मीणा ने फसल खराबे के सत्यापन की प्रक्रिया समझाई। समाज कल्याण विभाग के गजराज ने सरकारी योजनाओं की जानकारी दी।
शिविर में बताया गया कि वन्यजीव हमले के पीड़ित ‘आपदा पीड़ित’ की श्रेणी में आते हैं और उन्हें विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम की धारा 12 के तहत पूर्णतः नि:शुल्क कानूनी सहायता प्राप्त करने का अधिकार है।
शिविर के समापन पर रनवीर सिंह ने सभी प्रतिभागियों को ईमानदारी और जवाबदेही के साथ कार्य करने की शपथ दिलाई। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों का त्वरित निपटारा लोक अदालत के माध्यम से भी सुनिश्चित किया जाएगा।
इस प्रशिक्षण शिविर में जिले के कई पैनल अधिवक्ता, लीगल एड डिफेंस काउंसिल के सदस्य और पीएलवी मौजूद रहे।
मिशनसच न्यूज के लेटेस्ट अपडेट पाने के लिए हमारे व्हाट्सप्प ग्रुप को जॉइन करें।
https://chat.whatsapp.com/JX13MOGfl1tJUvBmQFDvB1
अन्य खबरों के लिए देखें मिशनसच नेटवर्क


