धार्मिक आस्था के केंद्र मंदिर संस्कृति और संस्कारों की विरासत, महिलाओं से परिवार को व्यसनमुक्त रखने का आह्वान
सोडावास। मंदिर और उनमें स्थापित मूर्तियां केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि हमारी प्राचीन संस्कृति और सभ्यता की पहचान भी हैं। भंडारे वसुधैव कुटुंबकम की परंपरा का प्रमाण हैं और समाज में आपसी सद्भावना एवं भाईचारे की भावना को मजबूत करने का कार्य करते हैं। यह बात चिरूणी हनुमान मंदिर के महंत दीपाई नाथ महाराज ने आयोजित धार्मिक कार्यक्रम के दौरान कही।
महंत दीपाई नाथ महाराज ने कहा कि भारतीय संस्कृति में मंदिरों का विशेष महत्व रहा है। मंदिर केवल पूजा-अर्चना के स्थान नहीं, बल्कि समाज को संस्कार, सेवा, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना से जोड़ने के केंद्र भी रहे हैं। प्राचीन मंदिरों में स्थापित मूर्तियां हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पुरातन सभ्यता की झलक प्रस्तुत करती हैं।
उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों के माध्यम से समाज में एकता और भाईचारे की भावना मजबूत होती है। भंडारे जैसी परंपराएं समाज के प्रत्येक वर्ग को साथ लेकर चलने और जरूरतमंदों की सेवा करने का संदेश देती हैं। वसुधैव कुटुंबकम की भावना भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण विशेषता रही है, जिसे ऐसे आयोजनों के माध्यम से आगे बढ़ाया जा सकता है।
महिलाओं से परिवार को व्यसन से दूर रखने का आह्वान
इस अवसर पर महंत दीपाई नाथ महाराज ने विशेष रूप से महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि परिवार में पुरुषों की गतिविधियों पर ध्यान रखना भी जरूरी है। उन्होंने महिलाओं से आह्वान किया कि वे अपने परिवार के सदस्यों को नशे और अन्य व्यसनों से दूर रखने में सकारात्मक भूमिका निभाएं।
उन्होंने कहा कि व्यसन का असर केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसका प्रभाव पूरे परिवार और समाज पर पड़ता है। इसलिए परिवार के सदस्यों को जागरूक करते हुए युवाओं को व्यसन से दूर रखने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना चाहिए।
धार्मिक कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने संत के प्रवचनों को सुना और धार्मिक आयोजनों के माध्यम से समाज में संस्कार एवं सद्भाव बनाए रखने का संदेश दिया गया।
मिशनसच न्यूज के लेटेस्ट अपडेट पाने के लिए हमारे व्हाट्सप्प ग्रुप को जॉइन करें।
https://chat.whatsapp.com/JX13MOGfl1tJUvBmQFDvB1
अन्य खबरों के लिए देखें मिशनसच नेटवर्क


