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    प्रो. रमेश बैरवा उत्पीड़न प्रकरण में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग सख्त, भेजा कड़ा नोटिस

    तीन नोटिसों के बाद भी जवाब नहीं देने पर आयोग ने जताई नाराजगी, 3 दिन में सूचना उपलब्ध कराने के निर्देश

    मिशनसच न्यूज, गंगापुर सिटी। राजकीय महाविद्यालय गंगापुर सिटी के राजनीति विज्ञान विभाग के आचार्य एवं राजकीय कन्या महाविद्यालय में प्राचार्य पद के विरुद्ध कार्यव्यवस्था पर सक्रिय नोडल अधिकारी प्रो. रमेश बैरवा के साथ कथित सेवा उत्पीड़न और भेदभाव के मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने आयुक्त कॉलेज शिक्षा राजस्थान को एक बार फिर कड़ा नोटिस जारी कर निर्धारित समय में जवाब नहीं देने पर गंभीर नाराजगी जताई है।

    आयोग द्वारा पूर्व में 15 दिसंबर 2025, 12 जनवरी 2026 और 21 जनवरी 2026 को तीन अलग-अलग नोटिस जारी कर मामले में विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई थी, लेकिन जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके बाद आयोग की उपनिदेशक अनुराधा दुसाने ने 4 फरवरी 2026 को पुनः नोटिस जारी करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि अपेक्षित सूचना तत्काल भेजी जाए, ताकि आयोग अध्यक्ष को वास्तविक स्थिति से अवगत कराया जा सके।

    प्रो. बैरवा द्वारा आयोग अध्यक्ष को भेजी गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि राजकीय महाविद्यालय गंगापुर सिटी की प्राचार्य प्रो. सुमित्रा मीणा के अवकाश पर जाने के बाद, वरिष्ठता के आधार पर उन्हें 19 नवंबर 2025 से कार्यवाहक प्राचार्य का चार्ज दिया गया था। किंतु अगले ही दिन आयुक्तालय कॉलेज शिक्षा के संयुक्त निदेशक एचआरडी डॉ. शोभाराम शर्मा ने उनकी वरिष्ठता को नजरअंदाज करते हुए उनसे जूनियर डॉ. बनवारी लाल मेनावत को चार्ज सौंपने के आदेश जारी कर दिए।

    शिकायत के अनुसार, प्रो. बैरवा का चयन वर्ष 1995 का है जबकि डॉ. मेनावत का चयन 1998 का है। वरीयता सूची में भी प्रो. बैरवा का स्थान 159 तथा डॉ. मेनावत का 1506 बताया गया है। इसके बावजूद उन्हें पद से वंचित किया जाना खुला भेदभाव बताया गया है।

    प्रो. बैरवा का आरोप है कि यह कदम उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाला है और इससे उन्हें मानसिक पीड़ा व स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि कार्यवाहक प्राचार्य की अनुमति के बिना देर रात जबरन चार्ज लिया गया तथा बाद में उन्हें कॉलेज के आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप में भी शामिल नहीं किया गया, जिससे अन्य संकाय सदस्यों के बीच उनका उपहास हुआ।

    इसके बाद उन्हें 25 किलोमीटर दूर स्थित राजकीय कन्या महाविद्यालय वजीरपुर में कार्य व्यवस्था के तहत भेज दिया गया, जबकि आदेश में यात्रा भत्ते का उल्लेख तक नहीं किया गया। उन्होंने कुछ अधिकारियों पर मिलीभगत कर लगातार कारण बताओ नोटिस देने और झूठी शिकायतें भेजकर उनकी आगामी सेवानिवृत्ति (31 मई 2026) में बाधा डालने का आरोप लगाया है।

    प्रो. बैरवा ने यह भी बताया कि उनका प्राचार्य पद पर चयन मनमाने तरीके से रोका गया है तथा वर्ष 2022-23 की निलंबन अवधि का निर्वाह भत्ता भी अब तक नहीं दिया गया। हाल ही में 29 जनवरी 2026 के आदेश से जूनियर अधिकारी को पुनः आहरण एवं वितरण अधिकारी (डीडीओ) की शक्ति देने से उन्हें फिर मानसिक आघात पहुंचा है।

    उन्होंने आयोग से न्याय की उम्मीद जताते हुए कहा कि उनके साथ हो रहे भेदभाव और उत्पीड़न पर रोक लगनी चाहिए तथा दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए।

    मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की सक्रियता के बाद शिक्षा विभाग में हलचल मची हुई है और अब आयोग की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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