सेवा न्याय और अनिवार्य सेवानिवृत्ति आदेश के विरोध में दलित शोषण मुक्ति मंच का संघर्ष जारी रखने का ऐलान
जयपुर। दलित शोषण मुक्ति मंच के बैनर तले दत्तोपंत ठेंगड़ी राष्ट्रीय श्रमिक शिक्षा एवं विकास बोर्ड (DTNBWED) के क्षेत्रीय निदेशालय, जयपुर के बाहर 2 जून से 8 जून 2026 तक संचालित धरना-प्रदर्शन ज्ञापन, शिकायत एवं जीरो एफआईआर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के बाद स्थगित कर दिया गया। मंच ने स्पष्ट किया कि कथित “फैंटम ऑफिस ऑर्डर संख्या 2034” एवं अनिवार्य सेवानिवृत्ति आदेश की निष्पक्ष जांच होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
धरना-प्रदर्शन में दलित शोषण मुक्ति मंच के राज्य सहसंयोजक डॉ. संजय “माधव”, अजय कुमार सेन सहित विभिन्न सामाजिक, श्रमिक, संवैधानिक एवं अनुसूचित जाति अधिकार संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
फैंटम ऑफिस ऑर्डर की वैधता पर उठाए सवाल
धरने का मुख्य मुद्दा कर्मचारी लक्ष्मण सरीयाला, ऑडियो विजुअल असिस्टेंट-कम-लाइब्रेरियन (AVACL), के विरुद्ध जारी अनिवार्य सेवानिवृत्ति आदेश दिनांक 2 जून 2026 तथा कथित कार्यालय आदेश संख्या DTNBWED/GT/Staff/2023/2034 दिनांक 26 मई 2023 की सत्यता, वैधता, अभिलेखीय अस्तित्व, निर्गमन, प्रेषण एवं सेवा की जांच की मांग रहा।
सभा को संबोधित करते हुए डॉ. संजय “माधव” ने आरोप लगाया कि कथित कार्यालय आदेश संख्या 2034 के अस्तित्व, अनुमोदन, निर्गमन, प्रेषण एवं सेवा के संबंध में पर्याप्त और सत्यापित अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए, जबकि उसी आदेश को विभागीय जांच एवं दंडात्मक कार्रवाई का आधार बनाया गया।
जांच में उठाए गए प्रमुख प्रश्न
मंच ने मांग की कि निम्न बिंदुओं की स्वतंत्र जांच कराई जाए—
- क्या कथित कार्यालय आदेश सक्षम प्राधिकारी द्वारा विधिवत जारी किया गया था?
- आदेश की मूल स्वीकृति एवं अनुमोदन फाइल कौन-सी है?
- आदेश का निर्गमन और प्रेषण किस प्रक्रिया से हुआ?
- आदेश की सेवा (Service) का वैधानिक प्रमाण क्या है?
- विभागीय जांच में इसे किस आधार पर स्वीकार किया गया?
- क्या अभिलेखीय हेरफेर, पश्चात सृजन (Post-Facto Creation) अथवा कूटरचना के संकेत मौजूद हैं?
अनुसूचित जाति कर्मचारियों के साथ भेदभाव के आरोप
डॉ. माधव ने आरोप लगाया कि अनुसूचित जाति वर्ग के कर्मचारियों को पदोन्नति, सेवा लाभ एवं समान अवसरों से वंचित किए जाने की शिकायतों की भी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कोई कर्मचारी अपने वैधानिक अधिकारों या सेवा संबंधी शिकायतों को उठाता है तो उसके विरुद्ध प्रतिकूल प्रशासनिक कार्रवाई के आरोपों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि बिना समुचित अभिलेखीय सत्यापन, बिना सेवा सुनिश्चित किए, बिना आवश्यक तथ्यात्मक परीक्षण और यथोचित प्रशासनिक सावधानी के अभाव में की गई कार्रवाई प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत हो सकती है तथा कर्मचारी के सम्मानजनक जीवन और संवैधानिक अधिकारों को प्रभावित कर सकती है।
केंद्रीय एजेंसियों को भेजे गए ज्ञापन
धरना समाप्ति के अवसर पर मंच ने बताया कि ज्ञापन, शिकायत एवं जीरो एफआईआर प्रतिवेदन भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, DTNBWED, केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI), पुलिस अधिकारियों एवं अन्य सक्षम प्राधिकारियों को भेज दिए गए हैं।
मंच ने मांग की कि कथित कार्यालय आदेश संख्या 2034, विभागीय जांच अभिलेखों तथा 2 जून 2026 के अनिवार्य सेवानिवृत्ति आदेश की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा जांच पूरी होने तक सभी संबंधित अभिलेख सुरक्षित रखे जाएं।
मंच ने कहा कि यदि शिकायतों का संतोषजनक समाधान नहीं हुआ तो “फैंटम ऑफिस ऑर्डर 2034” और सेवा न्याय के मुद्दे पर जन-जागरण एवं लोकतांत्रिक आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।
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