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    बजट में अनदेखी पर विधायक दीपचंद खेरिया नाराज, अधिकारियों पर प्रोटोकॉल उल्लंघन का आरोप

    खैरथल-तिजारा जिले के विकास कार्यों को शीघ्र शुरू करने की मांग, अधिकारियों पर सरकार से जवाबदेही तय करने का आग्रह

    किशनगढ़ बास। किशनगढ़ बास विधायक दीपचंद खेरिया ने विधानसभा के बजट सत्र में किशनगढ़ बास विधानसभा क्षेत्र सहित खैरथल-तिजारा जिले के लिए कोई विशेष घोषणा नहीं किए जाने पर सरकार के प्रति नाराजगी जताई है।

    विधायक खेरिया ने भाजपा नेताओं के प्रभाव में आकर विधायक प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई है। उनके निजी सहायक सुनील कान्त ने बताया कि विधायक ने विधानसभा में शिक्षा, चिकित्सा और यातायात व्यवस्था में सुधार सहित खैरथल जिला मुख्यालय पर निर्माण कार्य प्रारंभ करवाने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया।

    विधायक ने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के अंतिम वर्ष में घोषित और बजट प्रावधान वाले कई कार्य अब तक पूरे नहीं हो पाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह विफल साबित हो रही है।

    उन्होंने कहा कि जिले के गठन के समय एक हजार करोड़ रुपये का बजट दिया गया था, लेकिन अब तक उसका समुचित उपयोग नहीं हुआ है। जिला स्तरीय कार्यालयों के निर्माण तो दूर, भूमि आवंटन तक नहीं किया गया है। खैरथल में बाइपास ओवरब्रिज, जिला अस्पताल और किशनगढ़ बास में स्टेडियम सहित कई परियोजनाएं अधूरी पड़ी हैं।

    विधायक खेरिया ने जिला मुख्यालय खैरथल में भूमि आवंटन कर कार्यालय भवन निर्माण शुरू करने, संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण, जर्जर विद्यालय भवनों के पुनर्निर्माण, शिक्षा एवं चिकित्सा के रिक्त पदों को भरने और रोडवेज बस सेवा सुधारने की मांग की।

    साथ ही, नगर परिषद खैरथल, नगरपालिका किशनगढ़ बास और कोटकासिम के विकास कार्यों तथा खैरथल-तिजारा जिले के नामकरण और मुख्यालय की स्थिति स्पष्ट करने पर भी सवाल उठाए।

    विधायक ने सरकार से पूछा कि राज्य सरकार के आदेशों की अवहेलना करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी। उनका आरोप था कि कुछ अधिकारी भाजपा नेताओं के अनावश्यक दबाव में नियमों की पालना नहीं कर रहे हैं।

    उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि वे बिना किसी दबाव के नियमों के अनुसार जनता के हित में कार्य करें। साथ ही, नेताओं से भी जनभावनाओं का सम्मान करने और प्रशासनिक कार्यों में अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं करने की नसीहत दी।

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