धार्मिक आयोजन | भक्ति-प्रवचन

– कथा वाचक अमन भारती महाराज ने श्रीमद् भागवत ज्ञानयज्ञ में दी भक्ति और नाम-स्मरण की शिक्षा , बोले भगवान के नाम मात्र से ही जीवन का कल्याण संभव है”
मिशन सच नेटवर्क डेस्क ,राजगढ़ ।
“सच्चे मन से किया गया प्रभु का सुमिरन कभी व्यर्थ नहीं जाता।”
यही भावना झलक रही थी उस भक्ति से ओतप्रोत वातावरण में, जब प्रसिद्ध कथा वाचक अमन भारती महाराज ने श्रीमद् भागवत कथा में उपस्थित श्रद्धालुओं को भगवान की भक्ति और नाम-स्मरण का महत्व समझाया।
शिव मित्र मंडल सेवा समिति द्वारा कस्बे के नवीन बस स्टैंड पर आयोजित इस सात दिवसीय श्रीमद् भागवत ज्ञानयज्ञ कथा में बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु शामिल हुए। कथा के दौरान भाव-विभोर भजनों, सत्संगों और धार्मिक प्रसंगों ने माहौल को अध्यात्म से सराबोर कर दिया।
नाम-स्मरण से मोक्ष तक: अजामिल का प्रेरणादायक प्रसंग
कथा के दौरान अमन भारती महाराज ने अजामिल की कथा का विशेष रूप से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि —
“अजामिल ब्राह्मण होते हुए भी जीवन के पथ से भटक गया और एक वैश्या के साथ रहने लगा। पाप-कर्मों में लिप्त इस व्यक्ति के जीवन में मोड़ तब आया, जब उसने अपने बेटे का नाम ‘नारायण’ रखा।”
भगवान विष्णु के नाम के उच्चारण मात्र से जब यमदूत अजामिल को लेने आए, तो विष्णु के दूतों ने हस्तक्षेप किया और उसे मोक्ष प्रदान किया। यह प्रसंग महाराज ने बड़े भावुक अंदाज़ में प्रस्तुत करते हुए समझाया कि—
“नाम के हरि प्रेम से निश्चित ही भवसागर पार हो जाता है।”
भक्ति, संगीत और सत्संग का समन्वय
कथा आयोजन के दौरान अमन भारती महाराज ने भजनों और सत्संगों के माध्यम से भक्तों को भावविभोर कर दिया। उन्होंने कहा:
“नाम कीर्तन करो, सुधर जाओगे। जीवन में कुछ हिस्सा परोपकार में लगाओ। यही सच्ची भक्ति है।”
इस दौरान महर्षि दधीचि की कथा का उल्लेख करते हुए उन्होंने अस्थिदान के प्रसंग से परोपकार की महिमा को भी उजागर किया।
कथा के दौरान मंच संचालन और सहयोग में पंडित अजय शर्मा, पंडित शानू शर्मा, तथा संगीतकार संजय राजस्थानी की भूमिका सराहनीय रही। प्रवचनों के बीच-बीच में श्रद्धालु तालियों से वातावरण को गुंजायमान करते रहे।
रात्रि भजन संध्या में उमड़ा भक्तों का सैलाब
कथा आयोजन के पूर्व रात्रि को आयोजित भजन संध्या में प्रख्यात भजन गायक जगमोहन पाराशर ने भक्ति रस से सराबोर प्रस्तुति दी। एक से बढ़कर एक भजन जैसे:
“राम नाम का महिमा निराली…”
“श्याम तेरे बिना क्या जीवन मेरा…”
इन गीतों ने श्रोताओं को प्रभु भक्ति में पूरी तरह लीन कर दिया। पंडाल में श्रद्धा, प्रेम और उत्साह का अद्वितीय संगम देखने को मिला।
श्रद्धालुओं की अपार उपस्थिति और आयोजन की भव्यताकस्बे के नवीन बस स्टैंड परिसर में बना पंडाल श्रद्धालुओं से खचाखच भरा हुआ था। हर दिन की कथा में बड़ी संख्या में लोग श्रद्धा के साथ भाग ले रहे हैं। आयोजन में रमेश भारती सहित कई स्थानीय कार्यकर्ताओं ने व्यवस्था संभालने में योगदान दिया।
आयोजकों ने बताया कि श्रीमद् भागवत कथा का उद्देश्य केवल धर्म प्रचार नहीं, बल्कि नैतिक जीवन, परोपकार और आत्मशुद्धि का संदेश देना है।
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