परमाणु सुरक्षा को लेकर इस्लामाबाद से आया बयान, भारत-पाक समझौते की सराहना
इस्लामाबाद। भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण संबंधों के बावजूद परमाणु सुरक्षा को लेकर एक सकारात्मक पहलू सामने आया है। संयुक्त अरब अमीरात में पाकिस्तान के राजदूत फैसल नियाज तिरमिजी ने दोनों देशों के परमाणु सुरक्षा रिकॉर्ड की सराहना की है।
एक साक्षात्कार में तिरमिजी ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच एक-दूसरे की परमाणु सुविधाओं पर हमला न करने की पारस्परिक गारंटी वैश्विक स्तर पर एक मिसाल है। उन्होंने कहा कि दोनों देश लंबे समय से इस समझौते का पालन कर रहे हैं।
उन्होंने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्षों का जिक्र करते हुए कहा कि इस तरह की गारंटी आज के समय में और भी महत्वपूर्ण हो गई है। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव को उन्होंने चिंताजनक बताया।
तिरमिजी ने कहा कि यदि बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र जैसे संवेदनशील ठिकानों पर हमला होता है, तो इसके गंभीर और व्यापक परिणाम हो सकते हैं, जो पूरे क्षेत्र को प्रभावित करेंगे।
उन्होंने रूस को भारत-पाक संबंधों में एक निष्पक्ष मध्यस्थ के रूप में प्रस्तुत किया। उनका कहना था कि रूस के दोनों देशों के साथ अच्छे संबंध हैं और वह शांति बहाली में भूमिका निभा सकता है।
साक्षात्कार में डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका का भी जिक्र किया गया, जिसमें उन्होंने 2025 में भारत-पाक तनाव कम करने में अमेरिकी भूमिका की बात कही। हालांकि, भारत ने इस दावे को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि संघर्षविराम का निर्णय दोनों देशों के बीच सीधे सैन्य स्तर की वार्ता से हुआ था।
यह बयान जहां परमाणु सुरक्षा को लेकर दोनों देशों की जिम्मेदारी को दर्शाता है, वहीं कूटनीतिक मध्यस्थता को लेकर पुराने मतभेद भी सामने लाता है।
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