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    भीषण सड़क हादसे ने उजाड़े 16 घर, हाईवे पर एक साथ उठीं चिताएं

    धार में दर्दनाक सड़क हादसा, हाईवे की लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल

    धार। इंदौर-अहमदाबाद नेशनल हाईवे पर बुधवार की काली रात ने 16 परिवारों के आंगन सूने कर दिए। धार जिले के तिरला क्षेत्र के तीन गांवों—रामपुरा, सेमलीपुरा और नयापुरा में इस वक्त सन्नाटा और चीखें हैं। जिला अस्पताल में इतिहास में पहली बार एक साथ 16 शवों का पोस्टमार्टम किया गया, जिसके बाद जब एंबुलेंस का काफिला गांवों की ओर मुड़ा, तो पूरा इलाका विधार में दर्दनाक हादसा, हाईवे की लापरवाही पर उठे गंभीर सवाललाप से गूंज उठा। इस भीषण दुर्घटना ने न केवल परिवारों को उजाड़ा है, बल्कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की गंभीर लापरवाही को भी बेनकाब कर दिया है।

    नयापुरा में त्रासदी: एक ही परिवार के 8 सदस्यों का अंतिम संस्कार

    इस हादसे का सबसे भयावह मंजर नयापुरा गांव में देखने को मिला, जहां एक ही परिवार के 8 लोगों की मौत हो गई। गांव के गंगा महादेव मुक्तिधाम में जब एक साथ चिताएं सजाई गईं, तो जगह कम पड़ गई और श्मशान के बाहर भी दाह संस्कार करना पड़ा। संगीता, रिंकू, चंपालाल, आयुष, तनु, सुनीता, रंजना और सुमित—इन आठ नामों के साथ एक पूरा वंश ही मानों खत्म हो गया।

    उधर सेमलीपुरा में भी हृदयविदारक स्थिति रही, जहां चार महिलाओं—अंगूरीबाई, रंजना, कांता और भूरी का एक ही चिता पर अंतिम संस्कार किया गया। रामपुरा में भी दो महिलाओं की अंतिम विदाई हुई। इस सामूहिक विदाई को देख प्रशासनिक अधिकारियों और वहां मौजूद ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं।

    प्रशासन सख्त: NHAI की लापरवाही पर भेजा जाएगा नोटिस

    हादसे के बाद जांच के लिए पहुंचे डीआईजी (ग्रामीण) मनोज सिंह ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। जांच में सड़क निर्माण और सुरक्षा मानकों में भारी खामियां पाई गई हैं। डीआईजी ने स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया NHAI की लापरवाही सामने आई है, जिसके लिए जिला प्रशासन को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। हाईवे के उन सभी ब्लैक स्पॉट्स (संवेदनशील स्थानों) की दोबारा जांच की जाएगी जहां अक्सर हादसे होते हैं।

    घायलों की स्थिति और राहत कार्य

    हादसे में घायल 25 से ज्यादा लोगों का उपचार धार और इंदौर के एमवाय अस्पताल में चल रहा है। डॉक्टरों के अनुसार, 5 से ज्यादा लोगों की हालत अब भी चिंताजनक बनी हुई है। प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को तत्काल सहायता राशि उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है, लेकिन गांवों में पसरा मातम और उजड़े हुए घर इस बात की गवाही दे रहे हैं कि इस नुकसान की भरपाई किसी भी कीमत पर संभव नहीं है।

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