नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर जोर
प्रधानमंत्री ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम का उल्लेख करते हुए विधायिका में महिलाओं को आरक्षण देने को समय की जरूरत बताया। उन्होंने कहा कि इस कानून के लागू होने से लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व मिलेगा, जिससे लोकतंत्र अधिक व्यापक और प्रतिनिधिक बनेगा।
वेबसाइट पर साझा किया विस्तृत लेख
पीएम मोदी ने इस विषय पर अपने विचार अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित एक विस्तृत लेख में भी साझा किए। उन्होंने लिखा कि 21वीं सदी में भारत एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है और यह पहल समानता, समावेशन और जनभागीदारी को नए स्तर तक ले जाएगी। उन्होंने संसद से अपील की कि वह ऐसा कदम उठाए जो लोकतंत्र को और मजबूत बनाए।
अंबेडकर और फुले का किया स्मरण
अपने लेख में प्रधानमंत्री ने भीमराव अंबेडकर और महात्मा ज्योतिराव फुले का उल्लेख करते हुए सामाजिक न्याय और समानता के मूल्यों को याद किया। साथ ही उन्होंने देशभर में मनाए जाने वाले विभिन्न त्योहारों—रोंगाली बिहू, पणा संक्रांति, पोइला बैशाख, विषु, पुथांडु और बैसाखी—को आशा और सकारात्मकता का प्रतीक बताया।
हर क्षेत्र में बढ़ रही महिलाओं की भागीदारी
प्रधानमंत्री ने कहा कि महिलाएं देश की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करती हैं और विज्ञान, तकनीक, उद्यमिता, खेल, सशस्त्र बलों और कला जैसे हर क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बना रही हैं। उनके अनुसार, महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से न केवल नीति-निर्माण की गुणवत्ता सुधरती है, बल्कि शासन अधिक संवेदनशील और जवाबदेह बनता है।
2029 चुनाव तक लागू करने की बात
उन्होंने सितंबर 2023 में पारित इस अधिनियम को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि अब इसे लागू करने का समय आ गया है, ताकि 2029 के लोकसभा चुनाव और आगामी विधानसभा चुनावों में इसका लाभ मिल सके।
सभी दलों से सहयोग की अपील
अंत में प्रधानमंत्री ने सभी राजनीतिक दलों से इस पहल का समर्थन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह किसी एक सरकार या दल का नहीं, बल्कि पूरे देश का मुद्दा है और इसे सामूहिक संकल्प के साथ आगे बढ़ाना चाहिए।