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    मुख्यमंत्री आयुष्मान बाल सम्बल योजना का लाभ सीमित

    राजस्थान में आयुष्मान बाल सम्बल योजना से अब तक केवल 259 बच्चों को मदद, खैरथल-तिजारा जिले में एक भी लाभार्थी नहीं

    किशनगढ़ बास। राजस्थान में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित बच्चों के उपचार और उनके परिवारों को आर्थिक सहारा देने के उद्देश्य से वर्ष 2024 में मुख्यमंत्री आयुष्मान बाल सम्बल योजना शुरू की गई। हालांकि विडंबना यह है कि अब तक इस महत्वपूर्ण योजना का लाभ खैरथल-तिजारा जिले का एक भी व्यक्ति नहीं उठा पाया है, जबकि पूरे राजस्थान में केवल 259 बच्चों को ही इसका लाभ मिल सका है।

    जानकारी के अभाव या फिर सरकारी तंत्र की कमजोरियों के कारण योजना का लाभ सीमित लोगों तक ही पहुंच पाया है। ऐसे में यह विषय सरकार और प्रशासन के लिए चिंतन का विषय बन गया है।

    जिला परिवीक्षा एवं समाज कल्याण अधिकारी रमेश दहमीवाल ने बताया कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा संचालित यह योजना भारत सरकार की राष्ट्रीय दुर्लभ बीमारी नीति 2021 के तहत सूचीबद्ध बीमारियों से पीड़ित बच्चों के लिए शुरू की गई है। योजना का उद्देश्य गंभीर और दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे बच्चों को समय पर उपचार उपलब्ध कराना तथा उनके परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करना है।

    50 लाख तक आर्थिक सहायता

    इस योजना के अंतर्गत पात्र बच्चों को उपचार के लिए अधिकतम 50 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। इसके अलावा बच्चों की देखभाल और अन्य आवश्यक खर्चों के लिए प्रति माह 5000 रुपये की सहायता राशि भी दी जाती है।

    यह योजना 18 वर्ष से कम आयु के उन बच्चों के लिए है जिन्हें राष्ट्रीय दुर्लभ बीमारी नीति के अनुसार किसी दुर्लभ बीमारी से पीड़ित प्रमाणित किया गया हो। योजना में माता-पिता या पालनकर्ता की आय सीमा निर्धारित नहीं की गई है, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद परिवार इसका लाभ उठा सकें।

    अधिकृत संस्थानों से होगा प्रमाणन

    दुर्लभ बीमारी का प्रमाणन केवल अधिकृत चिकित्सा संस्थानों द्वारा किया जाएगा। इसके लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) जोधपुर और जे.के. लोन अस्पताल जयपुर को अधिकृत किया गया है। इन संस्थानों के विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा जांच के बाद यदि किसी बच्चे में दुर्लभ बीमारी की पुष्टि होती है, तो उसे योजना के तहत आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।

    इस योजना में उपचार के लिए राज्य सरकार द्वारा गठित दुर्लभ बीमारी निधि का उपयोग किया जाएगा, जिसमें सरकारी अनुदान के साथ-साथ क्राउड फंडिंग, दानदाताओं तथा कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के माध्यम से प्राप्त राशि भी शामिल की जा सकती है।

    कई गंभीर रोग शामिल

    राष्ट्रीय दुर्लभ बीमारी नीति 2021 के तहत लाइसोसोमल स्टोरेज डिसऑर्डर, म्यूकोपॉलीसैकराइडोसिस, एड्रेनोल्यूकोडिस्ट्रोफी, गंभीर संयुक्त प्रतिरक्षा कमी (SCID), क्रोनिक ग्रैनुलोमेटस रोग, विस्कोट एल्ड्रिच सिंड्रोम, ऑस्टियोपेट्रोसिस और फैंकोनी एनीमिया जैसे कई गंभीर रोगों को दुर्लभ बीमारी की श्रेणी में शामिल किया गया है।

    इसके अलावा टायरोसिनेमिया, ग्लाइकोजन स्टोरेज डिजीज, मेपल सिरप यूरिन डिजीज, यूरिया चक्र विकार, ऑर्गेनिक एसिडेमिया और पॉलीसिस्टिक किडनी रोग जैसी बीमारियों का उपचार अंग प्रत्यारोपण के माध्यम से संभव माना गया है। वहीं कुछ बीमारियों में लंबे समय तक विशेष आहार, दवाओं या महंगे उपचार की आवश्यकता होती है।

    ऐसे करें आवेदन

    योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए अभिभावक ई-मित्र या एसएसओ पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के दौरान बच्चे की चिकित्सकीय रिपोर्ट, जेनेटिक जांच रिपोर्ट और डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन अपलोड करना आवश्यक होगा। आवेदन संबंधित जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के पास जाएगा और जांच के बाद अधिकृत अस्पताल द्वारा प्रमाणन किया जाएगा।

    यदि बीमारी की पुष्टि हो जाती है तो ऑनलाइन प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा और आर्थिक सहायता स्वीकृत कर दी जाएगी। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से संचालित होती है तथा आवेदन से लेकर स्वीकृति और भुगतान तक की जानकारी आवेदक को मोबाइल संदेश के माध्यम से दी जाती है।

    महंगे उपचार के कारण अक्सर परिवार आर्थिक संकट में आ जाते हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री आयुष्मान बाल सम्बल योजना गंभीर और दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे बच्चों के लिए राहत का बड़ा माध्यम बन सकती है, बशर्ते इसकी जानकारी और पहुंच अधिक से अधिक लोगों तक सुनिश्चित की जाए।

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