नेता प्रतिपक्ष ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप, मानवाधिकार आयोग को लिखा पत्र; सीसीटीवी और मेडिकल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग
जयपुर। राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने जयपुर के मुहाना थाना क्षेत्र से जुड़े 19 वर्षीय ऋतुराज की इलाज के दौरान हुई मौत पर दुख और रोष जताते हुए पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। जूली ने आरोप लगाया कि पूछताछ और हिरासत के दौरान युवक के साथ मारपीट की गई, जिससे उसकी हालत बिगड़ी और बाद में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच फिलहाल जारी है।
जूली ने प्रदेश में पुलिस हिरासत में होने वाली मौतों और पुलिस बर्बरता की घटनाओं की रोकथाम को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को पत्र लिखकर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है।
पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाली पुलिस पर नागरिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऋतुराज की मां ने पूछताछ के दौरान मारपीट किए जाने की बात कही है और परिवार न्याय की मांग कर रहा है।
जूली ने यह भी आरोप लगाया कि परिवार पर दबाव बनाने और मामले से जुड़े तथ्यों को छिपाने का प्रयास किया गया। हालांकि, पुलिस ने युवक के साथ थाने में मारपीट के आरोपों से इनकार किया है और मामले की जांच जारी है।
मानवाधिकार आयोग ने भी लिया संज्ञान
मामले में राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लेते हुए मुहाना थाने की संबंधित अवधि की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने और सीलबंद हालत में पेश करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने जयपुर पुलिस आयुक्त, जिला मजिस्ट्रेट और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक मानवाधिकार से तथ्यात्मक रिपोर्ट भी मांगी है। मामले की जांच आईपीएस स्तर के अधिकारी से कराने के निर्देश दिए गए हैं।
आयोग की अगली सुनवाई 23 अक्टूबर को प्रस्तावित है। इससे पहले मामले में न्यायिक जांच की प्रक्रिया भी शुरू होने की जानकारी सामने आई है।
निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
टीकाराम जूली ने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए उच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में न्यायिक जांच कराई जाए। उन्होंने मुहाना थाने के सीसीटीवी फुटेज और मेडिकल रिपोर्ट को बिना किसी छेड़छाड़ के न्यायिक रिकॉर्ड में शामिल करने की मांग भी रखी।
उन्होंने घटना में पुलिसकर्मियों की भूमिका जांच में सामने आने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की। जूली ने पीड़ित परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता देने तथा परिवार के एक आश्रित को सरकारी नौकरी देने की मांग भी की।
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