उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति व जेंडर आधारित भेदभाव रोकने के लिए नए सख्त प्रावधान, 13 जनवरी से प्रभावी हुआ नियम
मिशनसच न्यूज, जयपुर। कॉलेज, विश्वविद्यालय एवं अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों पर प्रभावी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्धन हेतु) विनियम 2026 दिनांक 13 जनवरी से लागू हो गया है। राजस्थान विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक संघ रुक्टा डेमोक्रेटिक ने इस ऐतिहासिक नियम का स्वागत किया है। इसका मुख्य उद्देश्य शैक्षणिक परिसरों में जाति, जेंडर सहित सामाजिक भेदभाव को समाप्त करना और सभी छात्रों व कर्मचारियों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना है।
संगठन के प्रदेश संयोजक प्रो. रमेश बैरवा ने बताया कि यदि इस नियम को निष्ठा और निष्पक्षता से लागू किया गया तो उच्च शिक्षण संस्थानों में बढ़ते जातिगत व जेंडर आधारित भेदभाव एवं उत्पीड़न की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी। रुक्टा डेमोक्रेटिक लंबे समय से उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए कठोर नियमों की मांग करता रहा है।
उन्होंने बताया कि यूजीसी का 2026 का यह विनियम, वर्ष 2012 के समता संवर्धन नियमों का अद्यतन रूप है। 2012 का नियम केवल छात्रों पर लागू था, जबकि 2026 का नया रेग्युलेशन विद्यार्थियों के साथ-साथ शिक्षकों एवं अशैक्षणिक कर्मचारियों पर भी प्रभावी होगा। यह नियम उच्च शिक्षण संस्थानों में दलित छात्र रोहित वेमुला एवं मेडिकल छात्रा पायल तड़वी की आत्महत्या जैसी घटनाओं की पृष्ठभूमि में तथा सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद तैयार किया गया है।
प्रो. बैरवा ने कहा कि राजस्थान में भी ऐसे कठोर प्रावधानों की अत्यंत आवश्यकता थी, विशेषकर उन परिस्थितियों में जब कुछ संस्थानों में पदों का दुरुपयोग कर दलित व आदिवासी तबकों के छात्रों, शिक्षकों व कर्मचारियों का उत्पीड़न किया जाता रहा है।
यूजीसी समता विनियम 2026 के प्रमुख प्रावधान
• प्रत्येक संस्थान में इक्विटी कमिटी का गठन अनिवार्य होगा, जिसकी अध्यक्षता कुलपति, प्राचार्य या संस्था प्रधान करेंगे।
• कमिटी में एससी, एसटी, ओबीसी, दिव्यांग एवं महिला प्रतिनिधित्व अनिवार्य रहेगा।
• शिकायत निवारण एवं समानता संवर्धन हेतु सक्रिय केंद्र स्थापित करना होगा।
• हॉस्टल, लाइब्रेरी व सामान्य स्थानों में भेदभाव की निगरानी के लिए विशेष स्क्वॉड गठित किए जाएंगे।
• 24×7 हेल्पलाइन एवं ऑनलाइन शिकायत पोर्टल अनिवार्य रहेगा।
• प्रवेश एवं नियुक्ति के समय छात्र व कर्मचारी को भेदभाव न करने की शपथ लेनी होगी।
• नियमों की पालना नहीं करने पर यूजीसी योजनाओं से निलंबन, मंजूरी वापस लेने एवं मान्यता रद्द करने जैसी कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है।
रुक्टा डेमोक्रेटिक ने राज्य सरकार व यूजीसी से मांग की है कि इन नियमों को सभी संस्थानों में सख्ती से लागू कराया जाए ताकि उच्च शिक्षा परिसरों में समानता, न्याय और सम्मानजनक वातावरण सुनिश्चित हो सके।
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