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    रंगों से उभरी घुमंतू समाज की पहचान, अलवर में शुरू हुआ नया अध्याय

    सरूप विलास होटल की दीवार पर रंगों से सजी संस्कृति की तस्वीर, युवाओं ने अपनी विरासत को दी नई अभिव्यक्ति

    अलवर। घुमंतू समुदायों की पहचान, इतिहास, संस्कृति और परंपराओं को समाज के सामने लाने की पहल अब गांवों से निकलकर अलवर शहर तक पहुंच गई है। वर्ल्ड कॉमिक्स इंडिया की ओर से सरूप विलास होटल की बाहरी दीवार पर घुमंतू समुदायों की सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती ग्रैफिटी का अनावरण किया गया। इस कलाकृति के माध्यम से बंजारा, नट, राजनट, सपेरा और गाड़िया लोहार समुदायों की पारंपरिक जीवनशैली तथा सांस्कृतिक पहचान को रंगों के जरिए उकेरा गया है।

    ग्रैफिटी का अनावरण यूरोप से आईं सामाजिक विज्ञानी ईवा वॉलेंस्टेनर और दशरथ सिंह शेखावत ने संयुक्त रूप से किया। यह पहल घुमंतू समुदायों की उन कहानियों को सार्वजनिक स्थान पर सामने लाने का प्रयास है, जिन्हें अक्सर समाज में पर्याप्त जगह नहीं मिल पाती।

    पांच ग्रैफिटी के जरिए सामने आई सांस्कृतिक विरासत

    वर्ल्ड कॉमिक्स इंडिया के संस्थापक शरद शर्मा ने बताया कि संस्था अब तक घुमंतू समुदायों की पहचान और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाने वाली पांच ग्रैफिटी तैयार कर चुकी है। इनका उद्देश्य समुदायों को अपनी पहचान पर गर्व करने के लिए प्रेरित करना और आमजन को उनके इतिहास, परंपराओं तथा जीवनशैली से परिचित कराना है।

    उन्होंने बताया कि ऐसी कलाकृतियां सार्वजनिक स्थानों पर समुदायों की मौजूदगी और उनकी सांस्कृतिक विविधता को सामने लाने का माध्यम बन रही हैं। रंगों और चित्रों के जरिए इन समुदायों की परंपराओं को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

    अब समुदायों के युवा खुद बना रहे कलाकृतियां

    वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद मलिक ने बताया कि अब इन ग्रैफिटी को केवल पेशेवर कलाकारों तक सीमित नहीं रखा जा रहा, बल्कि घुमंतू समुदायों के युवा भी संयुक्त रूप से इन्हें तैयार कर रहे हैं। इससे समुदाय के युवाओं को अपनी संस्कृति और पहचान को स्वयं अभिव्यक्त करने का अवसर मिल रहा है।

    यह बदलाव इस पहल को और महत्वपूर्ण बनाता है, क्योंकि इसमें समुदायों की कहानियां बाहर से देखने के बजाय उनके अपने अनुभवों और सहभागिता के माध्यम से सामने आ रही हैं।

    ईवा वॉलेंस्टेनर ने समुदायों के लोगों से की चर्चा

    कार्यक्रम के दौरान सामाजिक विज्ञानी ईवा वॉलेंस्टेनर ने विभिन्न घुमंतू समुदायों के लोगों के साथ बैठकर उनके इतिहास, संस्कृति, परंपराओं और जीवन के अनुभवों पर चर्चा की। बातचीत के जरिए समुदायों के सामाजिक अनुभवों और उनकी सांस्कृतिक विरासत को समझने का प्रयास किया गया।

    वर्ल्ड कॉमिक्स इंडिया लंबे समय से घुमंतू एवं विमुक्त समुदायों की पहचान, अधिकारों और सांस्कृतिक विरासत को सामने लाने के लिए काम कर रहा है। संस्था की यह पहल उनकी कहानियों को सार्वजनिक मंच देने और समाज में उनके प्रति समझ तथा सम्मान बढ़ाने की दिशा में एक प्रयास है।

    कार्यक्रम में विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधि रहे मौजूद

    इस अवसर पर वर्ल्ड कॉमिक्स इंडिया की टीम से बी.एल. वर्मा, राहुल खान, संजू और करीना गौरी उपस्थित रहे। मेडी बास की संगीता, चंचल और संगीता सपेरा बास के प्रतिनिधियों के साथ गुजरात से आईं सामाजिक कार्यकर्ता स्मिता ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।

    अलवर शहर में इस ग्रैफिटी के अनावरण के जरिए घुमंतू समुदायों की सांस्कृतिक पहचान को सार्वजनिक स्थान पर अभिव्यक्ति मिली। यह पहल इस बात को रेखांकित करती है कि किसी समाज की विरासत को समझने और उसका सम्मान करने के लिए उसकी कहानियों को सुनना और उन्हें जगह देना जरूरी है।

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