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    राइट टू हेल्थ कानून पर भाजपा सरकार घिरी, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली का तीखा हमला

    दो साल में नियम नहीं बनने से आमजन वंचित, बोले– राजनीतिक द्वेष में छीना जा रहा स्वास्थ्य अधिकार

    जयपुर। राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने ‘राइट टू हेल्थ’ कानून के क्रियान्वयन को लेकर भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की उदासीनता और संवेदनहीन रवैये के कारण प्रदेश की जनता अपने कानूनी स्वास्थ्य अधिकार से वंचित हो रही है।

    विधानसभा में विधायक हरिमोहन शर्मा द्वारा उठाए गए प्रश्न और सरकार के अस्पष्ट जवाब पर प्रतिक्रिया देते हुए जूली ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने प्रदेश की जनता के हित में ऐतिहासिक ‘स्वास्थ्य का अधिकार’ कानून लागू किया था, जिससे राजस्थान देश का पहला राज्य बना। लेकिन भाजपा सरकार राजनीतिक द्वेष की भावना से इस कानून के नियम तक नहीं बना रही है, जिससे इसका लाभ आमजन तक नहीं पहुंच पा रहा।

    उन्होंने कहा, “कांग्रेस सरकार ने राजस्थान को देश का सिरमौर बनाया था, लेकिन भाजपा सरकार नियम न बनाकर इस कानूनी हक को खत्म करने पर उतारू है। भाजपा की यह संवेदनहीनता आम आदमी पर भारी पड़ रही है और इसकी बड़ी राजनीतिक कीमत सरकार को चुकानी पड़ेगी।”

    ऐतिहासिक कानून को ठंडे बस्ते में डालने का आरोप

    नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि ‘राइट टू हेल्थ’ कानून गरीब, वंचित और जरूरतमंद परिवारों के लिए सुरक्षा कवच की तरह था। इससे हर व्यक्ति को सम्मानपूर्वक इलाज का अधिकार मिलता था। लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी सरकार ने इसके नियम नहीं बनाए, जिससे यह कानून सिर्फ कागजों तक सीमित होकर रह गया है। उन्होंने कहा कि यदि नियम बनाकर इसे प्रभावी ढंग से लागू किया जाता तो लाखों लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलता।

    मंत्री के बयान ने बढ़ाई चिंता

    जूली ने विधानसभा में स्वास्थ्य मंत्री के उस बयान पर भी नाराजगी जताई, जिसमें कहा गया कि ‘इस एक्ट की आवश्यकता नहीं है’। उन्होंने इसे प्रदेश की जनता की उम्मीदों पर तुषारापात बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भाजपा सरकार आमजन को इलाज का कानूनी अधिकार देना ही नहीं चाहती? मंत्री का रुख साफ दर्शाता है कि सरकार इस जनहितैषी कानून को लागू करने के बजाय इसे समाप्त करने की मंशा रखती है।

    जनता के प्रति संवेदनहीनता का चरम

    नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि राजस्थान का ‘राइट टू हेल्थ’ कानून राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर सराहा गया था, लेकिन आज सरकार की अनदेखी के कारण यह उपलब्धि बेअसर होती जा रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार को जनता की बीमारी, उनके संघर्ष और इलाज की जद्दोजहद से कोई सरोकार नहीं है। आखिर क्यों प्रदेशवासियों को उनका स्वास्थ्य का कानूनी अधिकार नहीं दिया जा रहा, इसका जवाब सरकार को देना चाहिए।

    उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने जल्द नियम बनाकर कानून लागू नहीं किया तो जनता इसका जवाब लोकतांत्रिक तरीके से देगी।

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