एनीमेशन की दुनिया के लिए मिलेगा सम्मान, पिता-पुत्र की उपलब्धि से बहरोड़-अहीरवाल का बढ़ा गौरव
किशनगढ़ बास। प्रतिभा और मेहनत के दम पर ग्राम भूपखेड़ा के यतीन्द्र एस. यादव ने बहरोड़ और अहीरवाल क्षेत्र का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। यतीन्द्र यादव का चयन भारत सरकार के प्रतिष्ठित राजभाषा गौरव सम्मान के लिए हुआ है। उन्हें यह सम्मान उनकी मौलिक हिंदी पुस्तक ‘एनीमेशन की दुनिया’ के लिए प्रदान किया जाएगा। आगामी राजभाषा सम्मेलन में देश के गृहमंत्री द्वारा उन्हें सम्मानित किए जाने की जानकारी दी गई है।

यतीन्द्र की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है, क्योंकि वे ऐसे परिवार से आते हैं जहां हिंदी भाषा और साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान की गौरवशाली परंपरा रही है। उनके पिता सुबह सिंह यादव राजभाषा हिंदी और बैंकिंग साहित्य के क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं और भारत सरकार सहित विभिन्न संस्थानों से अनेक प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त कर चुके हैं।
पिता भी हिंदी सेवा में बना चुके हैं अलग पहचान
यतीन्द्र के पिता सुबह सिंह यादव बैंक ऑफ बड़ौदा अकादमी में शिक्षण प्रमुख के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। हिंदी और बैंकिंग साहित्य में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें विभिन्न स्तरों पर सम्मानित किया जा चुका है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार सुबह सिंह यादव को छह बार राष्ट्रपति पुरस्कार, छह बार योजना आयोग, पांच बार भारतीय रिजर्व बैंक, चार बार केंद्रीय वित्त मंत्रालय और दो बार गृह मंत्रालय से सम्मान प्राप्त हुआ है। हिंदी को बैंकिंग और तकनीकी क्षेत्र में प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने में उनके योगदान को उल्लेखनीय माना जाता है।
सुबह सिंह यादव के अनुसार वे अब तक 39 पुस्तकें लिख चुके हैं, जबकि उनके 720 से अधिक लेख राष्ट्रीय स्तर की पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। हिंदी को तकनीक और बैंकिंग जैसे क्षेत्रों से जोड़ने के उनके प्रयासों ने उन्हें अलग पहचान दिलाई है।
‘एनीमेशन की दुनिया’ से तकनीकी विषय को हिंदी में पहुंचाया
यतीन्द्र एस. यादव वर्तमान में गुरुग्राम स्थित बहुराष्ट्रीय कंपनी लक्ष्य डिजिटल में सीनियर एनवायरमेंटल आर्टिस्ट के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने एनीमेशन जैसे आधुनिक और तकनीकी विषय को सरल हिंदी में प्रस्तुत करते हुए अपनी पुस्तक ‘एनीमेशन की दुनिया’ तैयार की।
तकनीकी विषय को हिंदी में सहज तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पुस्तक की प्रमुख विशेषता बताई जा रही है। यही प्रयास उन्हें राजभाषा गौरव सम्मान तक ले गया।
पिता-पुत्र की उपलब्धि से क्षेत्र में खुशी
यतीन्द्र के सम्मान के चयन की खबर सामने आने के बाद बहरोड़, भूपखेड़ा और अहीरवाल क्षेत्र में खुशी का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिता के बाद पुत्र द्वारा हिंदी और तकनीकी लेखन के क्षेत्र में उपलब्धि हासिल करना पूरे क्षेत्र के लिए गौरव की बात है।
पिता-पुत्र की यह उपलब्धि हिंदी भाषा को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में भी एक प्रेरणादायक उदाहरण के रूप में देखी जा रही है।
मिशनसच न्यूज के लेटेस्ट अपडेट पाने के लिए हमारे व्हाट्सप्प ग्रुप को जॉइन करें।
https://chat.whatsapp.com/JX13MOGfl1tJUvBmQFDvB1
अन्य खबरों के लिए देखें मिशनसच नेटवर्क

