जिंदगी में कुछ मिले न मिले पर मौत जरूर मिलेगी, मृत्यु को महोत्सव बना लो
भीलवाड़ा। जिसने इस सृष्टि में जन्म लिया है उसकी मौत अवश्यभांवी है। जिंदगी मौत की अमानत है इसे संभाल कर रखो। हमे पता हो कि हमारे जीन का उद्ेश्य क्या है, बिना लक्ष्य तो पशु भी जीया करते है। जिंदगी से मृत्यु का मूल्य वसूल करो। याद रखे कई भवों तक ये आत्मा तड़फी है जब इसे मानव चोला प्राप्त हुआ है। बुढ़ापे में मृत्यु नहीं सुधरने वाली जवानी में जिंदगी को सुधार लो मृत्यु अपने आप सुधर जाएगी। जैसे हमे जीएंगे वैसी ही हमारी मृत्यु होगी। हम हंसकर जीए तो मृत्यु महोत्सव बन जाएगी ओर रो-रो कर जीए मृत्यु मातम बन जाएगी।
ये विचार भीलवाड़ा में पहली बार चातुर्मास कर रहे राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागर महाराज ने श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट, मैन सेक्टर शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से चित्रकूटधाम में आयोजित ज्ञान गंगा महोत्सव में गुरूवार को प्रवचन में व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि कुछ लोग जीवन जीने की कला सिखाते है पर मैं मृत्यु कैसे लानी है ये सिखाता हूं। मनुष्य जन्म में कुछ पद, प्रतिष्ठा, यश, धन पा सकोंगे या नहीं कोई गारंटी नहीं, जिंदगी में कुछ मिले या नहीं पर मौत जरूर मिलेगी। दुनिया में अमर कोई नहीं है, राजा हो या रंक यहां से सभी को जाना है। किसी की अर्थी देखकर ये नहीं कहे कि ये चला गया बल्कि बोले एक दिन मैं भी इसी तरह चला जाउंगा।
आचार्यश्री ने कहा कि दुनिया में कहीं भी चले जाओ मृत्यु से कोई नहीं बच सकता। मृत्यु नहीं आई तो जिंदगी बोझ बन जाएगी। मौत हमे ले जाकर उपकार करती है। मौत मातम नहीं महोत्सव हुआ करती है। मृत्यु नहीं होगी तो आत्मा को नया शरीर कहां से प्राप्त होगा। इसलिए मौत से डरो मत उसे महोत्सव बनाने का प्रयास करो।
आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि मृत्यु को महोत्सव बनाना है तो जिदंगी में दुश्मनों की संख्या घटाते ओर दोस्तों की बढ़ाते चलो। दुकान के साथ जिंदगी के बहीखाते भी मिलाते चलो। सोने से पहले जिंदगी का हिसाब किताब सुधार लो। मौत से वहीं डरता है जिसके जिंदगी के बहीखाते गड़बड़ होते है। परनिंदा छोड़ अपने भीतर झांकना शुरू कर दे। जिंदगी एक किराए का घर है एक दिन बदलना ही पड़ेगा, मौत जब तुझकों आवाज देंगी घर से बाहर निकलना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि हम जीवन भर कितनी भी धन संपदा जोड़ ले पर याद रखे कफन में जेब नहीं होती, सब कुछ यहीं छूट जाएगा, खाली हाथ आए ओर खाली हाथ ही जाना पड़ेगा। मरने के बाद केवल व्यक्ति का व्यवहार ओर चरित्र ही याद रहता है। अपना व्यवहार ऐसा बनाओ कि किसी के दिल में छुपकर जिंदा रह सको।
प्रवचन से पूर्व दीप प्रज्वलन, पाद प्रक्षालन एवं मंगलाचरण
प्रवचन के प्रारंभ में दीप प्रज्वलन एवं आचार्यश्री के पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट का सौभाग्य श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट शास्त्रीनगर के पदाधिकरियों ने एवं आचार्य पुलकसागर के सांसारिक बहन मंजूदेवी एवं बहनाई शिरीष जैन ने प्राप्त किया। दिगम्बर जैन महासभा के अध्यक्ष सुनील जैन ने आचार्यश्री को श्रीफल समर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
सौभाग्यशाली परिवार एवं अतिथियों का स्वागत श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी, संयोजक मनीष शाह, सह संयोजक लोकेश अजमेरा आदि पदाधिकारियों ने किया। शास्त्रीनगर बालिका मण्डल की सदस्यों ने मंगलाचरण की प्रस्तुति दी। संचालन चातुर्मास समिति के महामंत्री जयकुमार पाटनी ने किया। भीलवाड़ा शहर एवं आसपास के विभिन्न क्षेत्रों से सर्व समाज के हजारों लोग ज्ञान की गंगा में डूबकी लगाने के लिए चित्रकूटधाम पहुंचे थे।
आचार्य पुलकसागर के सानिध्य में रक्षाबंधन पर कल होगा विशेष आयोजन
ज्ञान गंगा महोत्सव के तहत आचार्य पुलकसागर महाराज ससंघ के सानिध्य में 28 अगस्त को रक्षाबंधन पर विशेष आयोजन किया कर मुनि रक्षा का संकल्प लिया जाएगा। ये पर्व उन 700 मुनियों की रक्षा के उपलक्ष्य में मनाया जाएगा जिन पर घोर उपसर्ग आया था। इस आयोजन के माध्यम से उसी एतिहासिक प्रसंग को नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से सजीव मंचन किया जाएगा। इस अवसर पर मुनियों के प्रति अगाध श्रद्धा निवेदित करते हुए मंत्रोच्चार के साथ 700 श्रीफल समर्पित किए जाएंगे।
इस भव्य आयोजन के लिए श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति ने अध्यक्ष प्रवीण चौधरी के नेतृत्व में व्यापक तैयारियां की गई है। ज्ञान गंगा महोत्सव के तहत 30 अगस्त तक प्रतिदिन सुबह 8.30 से 10 बजे तक चित्रकूटधाम में प्रवचन हो रहे है। शाम 7 से 8 बजे तक आनंद यात्रा एवं आरती का आयोजन किया जा रहा है जिसमें भी शहर के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु शामिल होकर लाभ प्राप्त कर रहे है।
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