नेता प्रतिपक्ष का केंद्र व राज्य सरकार पर हमला
अलवर/जयपुर। राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने अरावली पर्वत श्रृंखलाओं में हो रहे खनन को लेकर केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकारें भू-माफिया और खनन माफियाओं को संरक्षण देकर राजस्थान की जनता के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही हैं और प्रदेश को रेगिस्तान बनाने के “डेथ वारंट” पर हस्ताक्षर कर रही हैं।
रविवार को मोती डूंगरी स्थित कार्यालय पर मीडिया को संबोधित करते हुए जूली ने कहा कि एक ओर भाजपा नेता “एक पेड़ मां के नाम” अभियान चलाते हैं, वहीं दूसरी ओर लाखों पेड़ काटकर अरावली पर्वतमालाओं को खोखला किया जा रहा है। उन्होंने इसे पर्यावरण के साथ खुला विश्वासघात बताया।
सेव अरावली-सेव सरिस्का देशव्यापी अभियान
जूली ने कहा कि “सेव अरावली-सेव सरिस्का” केवल कांग्रेस की लड़ाई नहीं, बल्कि देश के चार राज्यों को बचाने का महाअभियान है। उन्होंने कहा कि हरियाली बचाने का संदेश देने वाले ही आज अरावली का गला घोंट रहे हैं। अरावली में किए जा रहे घाव आने वाली पीढ़ियों के जीवन को संकट में डाल रहे हैं।
उन्होंने पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ पर भी निशाना साधते हुए कहा कि गंभीर मुद्दों पर हास्यपद बयानबाजी कर केवल मीडिया की सुर्खियां बटोरी जा रही हैं।
अलवर सांसद पर सीधा हमला
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव पर सीधा हमला बोलते हुए टीकाराम जूली ने कहा कि जिस अजमेर की गोद में खेलकर वे बड़े हुए, आज उसी अरावली का चीरहरण करते समय उनके हाथ नहीं कांपे।
“अलवर की जनता ने आपको सांसद इसलिए चुना था कि आप उनकी आवाज बनें, लेकिन आप खनन माफियाओं के ब्रांड एंबेसेडर बन गए हैं,” जूली ने कहा।
उन्होंने आरोप लगाया कि पर्यावरण मंत्रालय अब खनन मंत्रालय की फाइलें पास करने तक सीमित रह गया है। “आप अरावली को नहीं मिटा रहे, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए राजस्थान को रेगिस्तान बनाने के डेथ वारंट पर हस्ताक्षर कर रहे हैं। इतिहास गवाह रहेगा कि जब अरावली रो रही थी, तब पर्यावरण मंत्री उसकी बोली लगा रहे थे।”
2010 बनाम 2024: भाजपा का यू-टर्न
जूली ने दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि 16 फरवरी 2010 को तत्कालीन सरकार ने 100 मीटर ऊंचाई की परिभाषा का तर्क दिया था, जिसे 19 फरवरी 2010 को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर पूरी पर्वत श्रृंखला को अरावली माना। कांग्रेस सरकार ने कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हुए फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया से सैटेलाइट मैपिंग करवाई।
उन्होंने आरोप लगाया कि 2024 में भाजपा सरकार ने उसी खारिज परिभाषा को पुनः लागू करने की सिफारिश की और केंद्र सरकार ने कोर्ट में उसी का समर्थन किया। “यह जानबूझकर किया गया षड्यंत्र है,” जूली ने कहा।
अवैध खनन पर कार्रवाई: आंकड़े बोलते हैं
टीकाराम जूली ने कांग्रेस और भाजपा सरकारों के कार्यकाल की तुलना करते हुए कहा—
कांग्रेस सरकार (2019–2024):
कुल 4,206 FIR
2019-20: 930
2020-21: 760
2021-22: 1,305
भाजपा सरकार (2024-25):
केवल 508 FIR
उन्होंने कहा कि FIR की संख्या में भारी गिरावट से स्पष्ट है कि भाजपा की नीति माफियाओं के प्रति नरम है।
जुर्माना वसूली में भी बड़ा अंतर
भाजपा सरकार (2013–2018): 5 वर्षों में केवल 200 करोड़ रुपये की वसूली
कांग्रेस सरकार (2019–2024): 5 वर्षों में 464 करोड़ रुपये का जुर्माना
“यह भाजपा के कार्यकाल से दोगुने से भी अधिक है,” जूली ने कहा।
तीन बड़ी मांगें
नेता प्रतिपक्ष ने मांग की कि—
केंद्र और राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में तुरंत पुनर्विचार याचिका दायर करें।
अरावली संरक्षण के लिए राजस्थान का अलग और सख्त कानून बनाया जाए।
अवैध खनन पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
खेजड़ली की चेतावनी
जूली ने चेतावनी देते हुए कहा,
“राजस्थान का इतिहास खेजड़ली का रहा है, जहां पेड़ों के लिए सिर कट गए थे। हमारे पूर्वजों ने पेड़ों के लिए बलिदान दिया, और आज आप पहाड़ बेचने की बात कर रहे हैं। हम यह होने नहीं देंगे।”
नारा:
खेजड़ली में सिर दिए थे, अरावली के लिए आवाज दो
पहाड़ बेचने वालों को अब करारा जवाब दो
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