+राजस्थान पुजारी महासंघ अलवर 14 सितम्बर को दोपहर 12 बजे सागर जलाशय पर सर्व पितृ शांति हेतु सामूहिक तर्पण करेगा।
मिशन सच न्यूज, अलवर– पितृ पक्ष हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। इस पवित्र काल में लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की, शांति और मोक्ष के लिए श्राद्ध, तर्पण और दान-पुण्य करते हैं। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए राजस्थान पुजारी महासंघ अलवर ने घोषणा की है कि रविवार, 14 सितम्बर को दोपहर 12 बजे, शहर के प्रसिद्ध सागर जलाशय पर सर्व पितृ शांति हेतु सामूहिक तर्पण का आयोजन किया जाएगा।
तर्पण का महत्व
हिंदू शास्त्रों में कहा गया है कि “पितृ देवता सन्तुष्ट हों तो देवता भी प्रसन्न होते हैं।”
पितृ पक्ष के दौरान किया गया तर्पण पितरों की आत्मा को तृप्ति और शांति प्रदान करता है। यह केवल धार्मिक कर्मकांड ही नहीं, बल्कि अपनी जड़ों और पूर्वजों के प्रति सम्मान प्रकट करने का माध्यम है।
महासंघ के पदाधिकारियों का मानना है कि आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में लोग कई बार विधिवत श्राद्ध और तर्पण नहीं कर पाते। ऐसे में यह सामूहिक तर्पण उन सभी के लिए अवसर है जो अपने पितरों की आत्मा की शांति चाहते हैं।
कार्यक्रम की जानकारी
महासंघ के पंडित विवेकानन्द शर्मा ने जानकारी दी कि यह तर्पण पूरे वेद मंत्रों के उच्चारण और वैदिक विधि-विधान के साथ सम्पन्न होगा।
स्थान: सागर जलाशय, अलवर
तिथि: रविवार, 14 सितम्बर 2025
समय: दोपहर 12:00 बजे से
उन्होंने बताया कि यह आयोजन समाज के सभी वर्गों के लिए खुला है। कोई भी व्यक्ति, चाहे उसका गोत्र या परंपरा कुछ भी हो, अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए इस कार्यक्रम में शामिल हो सकता है।
श्रद्धालुओं के लिए आमंत्रण
महासंघ ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे इस अवसर का लाभ उठाएँ और सामूहिक तर्पण में शामिल होकर अपने पितरों को श्रद्धांजलि दें। तर्पण के दौरान मंत्रोच्चारण, जल अर्पण और अन्य धार्मिक क्रियाएँ विधिपूर्वक कराई जाएँगी।
कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल धार्मिक रीति का पालन करना है, बल्कि समाज में एकता और सांस्कृतिक परंपराओं को भी आगे बढ़ाना है। सामूहिक रूप से किया गया तर्पण लोगों को एक-दूसरे से जोड़ता है और साझा आस्था का प्रतीक बनता है।
पितृ पक्ष और सामाजिक संदेश
पितृ पक्ष केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। यह हमें हमारी विरासत और संस्कृतियों की याद दिलाता है। जब हम अपने पितरों का स्मरण करते हैं, तो यह हमें यह सिखाता है कि वर्तमान पीढ़ी को भी आने वाली पीढ़ियों के लिए अच्छे संस्कार छोड़ने चाहिए।
राजस्थान पुजारी महासंघ अलवर का यह प्रयास आने वाली पीढ़ियों को भारतीय संस्कृति और परंपरा से जोड़ने का एक अहम कदम है।
14 सितम्बर को सागर जलाशय पर होने वाला यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह समाज को एकजुट करने का भी प्रयास है।
Mission Sach अपने पाठकों से अपील करता है कि यदि आप अलवर और आसपास के क्षेत्रों से हैं, तो इस कार्यक्रम में सम्मिलित होकर अपने पितरों की आत्मा की शांति हेतु तर्पण अवश्य करें।
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