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    राजस्थान में सिस्टम फेल, जूली का हमला—संविधान ही कर्मचारियों का कवच

    राजस्थान सरकार पर जंगलराज का आरोप, चुनाव टालने को लेकर बढ़ा सियासी हमला

    जयपुर। राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि राज्य में “सिस्टम का पूर्ण ब्रेकडाउन” हो चुका है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि हालात ऐसे हैं कि दीया लेकर ढूंढने पर भी सरकार नजर नहीं आती और ऐसा लगता है जैसे निर्वाचित सरकार का अस्तित्व ही खत्म हो गया हो।

    उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान भाजपा सरकार जनता के प्रति जवाबदेह होने के बजाय केवल “दिल्ली दरबार के एक्सटेंशन काउंटर” की तरह काम कर रही है।

    कर्मचारियों के मुद्दे पर बोलते हुए टीकाराम जूली ने केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत द्वारा कथित धमकी पर कड़ा एतराज जताया। उन्होंने कहा कि एक केंद्रीय मंत्री खुलेआम कर्मचारियों को धमका रहे हैं और राज्य सरकार चुप बैठी है, जो कायरता और कर्मचारियों के साथ विश्वासघात है।
    उन्होंने कर्मचारियों से आह्वान करते हुए कहा कि वे किसी व्यक्ति या दल के नहीं, बल्कि संविधान के प्रति जवाबदेह हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि जो संविधान के अनुसार कार्य करेगा, उनके लिए वे “मजबूत कवच” बनकर खड़े रहेंगे।

    नेता प्रतिपक्ष ने सरकार पर पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों से बचने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार ओबीसी आरक्षण आयोग के कार्यकाल की आड़ लेकर चुनाव टालने के लिए बहाने बना रही है।
    इस दौरान उन्होंने किशनसिंह तोमर बनाम म्युनिसिपल कॉरपोरेशन ऑफ अहमदाबाद (2006) का हवाला देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के अनुसार समय पर चुनाव कराना अनिवार्य है, अन्यथा संवैधानिक संकट पैदा हो सकता है।

    कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और “जंगलराज” जैसी स्थिति बन चुकी है। जोधपुर के भीकमकोर में दिनदहाड़े हुई हत्या का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कानून का इकबाल खत्म हो चुका है।

    विकास कार्यों को लेकर भी सरकार को घेरते हुए टीकाराम जूली ने कहा कि प्रदेश में कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं ठप पड़ी हैं। जयपुर के कांवटिया अस्पताल के विस्तार और ट्रॉमा सेंटर का प्रस्ताव लंबे समय से लंबित है, वहीं जयपुर मेट्रो फेज-2 की डीपीआर भी महीनों से केंद्र सरकार के पास अटकी हुई है। उन्होंने इसे राज्य और केंद्र के बीच समन्वय की कमी बताया।

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