दशहरे पर मंच सजा, राम ने रावण पर विजय पाई, पुतले जले, नेताओं ने भाषण दिए पर कला मंच का भवन का सपना इस बार भी पूरा नहीं।
किशनगढ़ बास। विजयदशमी पर राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के खेल मैदान में हर साल की तरह इस साल भी नगर पालिका का मंच सजा, हजारों की भीड़ जुटी, नेता आए और भगवान श्री राम ने तीर से रावण, मेघनाद, कुंभकर्ण के पुतलों में आग लगाकर बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया। लेकिन इस जीत के शोर में हर बार कला मंच के जर्जर भवन के निर्माण के लिए नहीं पूरे शहर के विकास के लिए 50 लाख रुपए की घोषणा नगर पालिका को दिए जाने की घोषणा केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने की है। उन्होंने कहा है नगर पलिका अध्यक्ष शहर में कहीं भी विकास के काम में लें सकते हैं।
इससे पहले किशनगढ़ पीजी ग्राउंड में करीब 15 दिन से चल रही रामलीला के कलाकारों ने विजयदशमी पर भगवान राम की भव्य बारात निकाली। पीजी ग्राउंड से निकली बारात शहर के मुख्य मार्गों से होती हुई दशहरा मैदान पहुंची। ट्रैक्टर-गाड़ियों में राम, हनुमान और रावण का अलग-अलग दरबार सजा था, पूरा शहर जय श्रीराम के नारों से गूंजमानय हो उठा था।
दशहरा मैदान में कला मंच के कलाकारों ने रावण वध की लीला का इतना प्रभावी मंचन किया कि पूरा ग्राउंड जयकारों से गूंज उठा। हजारों की भीड़ के बीच पहुंचे केंद्रीय मत्री भूपेंद्र यादव ने मंच से असत्य पर सत्य की जीत का संदेश दिया, रामायण जी और भगवान श्री राम की आरती की, शहरवासियों को विजयदशमी की बधाई दी और कला मंच के कलाकारों की जमकर प्रशंसा कर उन्हें सम्मानित भी किया। नगर पालिका अध्यक्ष विश्वास यादव सहित कला मंच के सदस्यों ने मंत्री भूपेंद्र यादव का पधारने पर स्वागत किया।
दशहरे पर मंच सजता है, कला मंच के कलाकार मुफ्त में, बिना किसी पारिश्रमिक के, महीनों की मेहनत से पूरे शहर को रामलीला दिखाते हैं, धर्म की अलख जगाते हैं और अंत में विजयदशमी पर मंच से उनके भवन के लिए घोषणा होती है। लेकिन इस बार कला मंच के भवन के लिए घोषणा नहीं बल्कि पूरे शहर के विकास के लिए 50 लाख रुपए देने की हुई घोषणा केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने की है। उन्होंने कहा है नगर पालिका अध्यक्ष शहर के विकास में कहीं भी खर्च कर सकते हैं। हो सकता इस बार कला मंच के लिए घोषणा नहीं किए जाने के पीछे कोई अच्छा ही छुपी हो।
यह कैसी विडंबना है कि जो संस्था शहर को दशकों से मुफ्त में संस्कार दे रही है,अगर संस्था न होती तो नगर पालिका का दशहरा सिर्फ पुतला जलाने तक सीमित रह जाता, उसी संस्था का भवन आज गिरने की कगार पर है। बरसात में छत टपकती है, दीवारों में दरारें हैं, लेकिन कलाकारों का जज्बा नहीं टूटा। बुराई पर अच्छाई की जीत तो दिखा दी, अब वादे पर अमल की जीत कब होगी, यह राम ही जाने।


