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    रुपवास व राजाखेड़ा को आकांक्षी ब्लॉक में शामिल करने की मांग तेज

    ब्लॉक चयन पर पुनर्विचार की मांग, मुख्यमंत्री को पत्र भेजा गया

    भरतपुर। राजस्थान में आकांक्षी ब्लॉकों के चयन को लेकर एक बार फिर पुनर्विचार की मांग उठी है। समृद्ध भारत अभियान के निदेशक सीताराम गुप्ता ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर भरतपुर जिले के रुपवास और धौलपुर जिले के राजाखेड़ा को राज्य सरकार द्वारा चयनित आकांक्षी ब्लॉकों की सूची में शामिल करने का आग्रह किया है।

    आकांक्षी ब्लॉक रुपवास राजाखेड़ा
    आकांक्षी ब्लॉक रुपवास राजाखेड़ा

    अपने पत्र में गुप्ता ने कहा कि इन दोनों ब्लॉकों में सामाजिक, आर्थिक और विकास से जुड़े मानकों पर अधिक पिछड़ापन और गरीबी देखी जाती है। इसलिए यदि इन्हें आकांक्षी ब्लॉक योजना में शामिल किया जाता है, तो यहां समग्र विकास की गति तेज हो सकती है।

    उन्होंने बताया कि राजस्थान में कुल 68 आकांक्षी ब्लॉकों का चयन किया गया है, जिनमें 27 ब्लॉक केंद्र सरकार के नीति आयोग द्वारा और 41 ब्लॉक राज्य सरकार द्वारा चयनित हैं। भरतपुर जिले से वर्तमान में भुसावर ब्लॉक और धौलपुर जिले से सैंपऊ ब्लॉक को शामिल किया गया है।

    हालांकि, गुप्ता का कहना है कि वास्तविक विकास संकेतकों के आधार पर रुपवास और राजाखेड़ा इनसे अधिक पिछड़े हुए हैं, इसलिए इनका चयन अधिक उपयुक्त होगा। उन्होंने आग्रह किया कि चयन से पहले स्थानीय वास्तविकताओं का पुनर्मूल्यांकन किया जाए ताकि योजना का लाभ वास्तव में वंचित क्षेत्रों तक पहुंच सके।

    पत्र में यह भी कहा गया है कि आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, कृषि, जल संरक्षण, रोजगार, महिला सशक्तिकरण और आधारभूत संरचना जैसे क्षेत्रों में तेजी से सुधार लाना है। इसके लिए विभिन्न विभागों की योजनाओं को एकीकृत कर मिशन मोड में कार्य करना जरूरी है।

    गुप्ता ने सुझाव दिया कि प्रत्येक ब्लॉक में मासिक समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएं और जिला प्रशासन, पंचायत राज संस्थाओं, सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए।

    उन्होंने यह भी कहा कि इस योजना के लिए अतिरिक्त बजट की आवश्यकता नहीं है, बल्कि बेहतर नेतृत्व, नियमित मॉनिटरिंग और स्पष्ट कार्यशैली से ही बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे “आजादी का अमृत महोत्सव” जनभागीदारी से सफल हुआ, उसी तरह इस योजना को भी सफल बनाया जा सकता है।

    यह मांग अब प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है और स्थानीय स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर आवाज तेज हो रही है।

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