More
    Homeराजस्थानअलवरलक्ष्मणगढ़ में दस लक्षण पर्व के चौथे दिन उत्तम शौच धर्म की...

    लक्ष्मणगढ़ में दस लक्षण पर्व के चौथे दिन उत्तम शौच धर्म की आराधना, मंदिर में गूंजे धर्म संदेश

    आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना, लोभ और ईर्ष्या छोड़ संतोष व आत्मशुद्धि का दिया संदेश

    लक्ष्मणगढ़। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मनुष्य के पास घर-परिवार के लिए भी समय सीमित होता जा रहा है। ऐसे में स्वयं के भीतर झांककर आत्मचिंतन करने का अवसर मिलना और भी कठिन हो गया है। जैन धर्म के दस लक्षण पर्व का आध्यात्मिक महत्व इसी आत्मचिंतन और आत्मशुद्धि से जुड़ा है। पर्व के दौरान धार्मिक वातावरण तप, संयम और साधना से सराबोर हो जाता है।

    लक्ष्मणगढ़ कस्बे के आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में दस लक्षण पर्व के चौथे दिन विशेष पूजा-अर्चना के साथ उत्तम शौच धर्म मनाया गया। श्रद्धालुओं ने धार्मिक विधि-विधान के साथ आराधना की और उत्तम शौच धर्म के माध्यम से बाहरी स्वच्छता के साथ अंतःकरण की निर्मलता का महत्व समझा।

    शरीर की स्वच्छता के साथ मन की शुद्धता भी जरूरी

    जैन दर्शन में शौच धर्म का अर्थ केवल शरीर, वस्त्र या आसपास के वातावरण की सफाई तक सीमित नहीं है। इसका मूल संदेश मन और आत्मा को ईर्ष्या, लोभ, मोह, राग और द्वेष जैसे विकारों से मुक्त करने से जुड़ा है।

    धार्मिक चिंतन के अनुसार वर्तमान समय उपभोगवाद और भौतिक आकर्षण से प्रभावित है। मनुष्य बाहर से कितना भी स्वच्छ और व्यवस्थित दिखाई दे, लेकिन यदि उसके भीतर ईर्ष्या, लोभ और असंतोष मौजूद है तो वास्तविक शुचिता अधूरी मानी जाती है। उत्तम शौच धर्म यह संदेश देता है कि जब मन निर्मल होगा, तभी व्यक्ति का व्यवहार, परिवार और सामाजिक वातावरण भी सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ेगा।

    बाहरी नहीं, आंतरिक शुद्धता को बताया वास्तविक शौच

    जैन दर्शन में शौच के दो प्रमुख स्वरूप बताए गए हैं। पहला बाह्य शौच, जिसमें शरीर, वस्त्र, आहार और परिवेश की स्वच्छता शामिल है। यह स्वस्थ जीवन के लिए आवश्यक है। दूसरा और अधिक महत्वपूर्ण आभ्यंतर शौच है। इसमें राग, द्वेष, मोह और लोभ से मुक्त होकर आत्मा को संयम, संतोष और साधना के माध्यम से निर्मल बनाने पर जोर दिया जाता है। धार्मिक दृष्टि से बाहरी स्वच्छता शरीर और वातावरण को स्वस्थ रखने में सहायक होती है, जबकि आंतरिक शुद्धता व्यक्ति के आत्मिक उत्थान का मार्ग प्रशस्त करती है।

    संतोष और आत्मनिरीक्षण से शुद्ध होता है जीवन

    उत्तम शौच धर्म के आचरण में संतोष, आत्मनिरीक्षण, लोभ का त्याग, ध्यान और स्वाध्याय को विशेष महत्व दिया गया है। संतोष का अर्थ है अपनी परिस्थितियों में प्रसन्न रहना और अनावश्यक इच्छाओं के पीछे भागने से बचना। आत्मनिरीक्षण के माध्यम से व्यक्ति अपने भीतर मौजूद कमियों और दोषों को पहचानकर उन्हें दूर करने का प्रयास करता है।  इसी प्रकार धन, वस्त्र, आभूषण और इंद्रिय सुखों के प्रति अत्यधिक आसक्ति से बचना भी शौच धर्म की भावना से जुड़ा है। ध्यान और स्वाध्याय के माध्यम से आत्मा के वास्तविक और शुद्ध स्वरूप का चिंतन करने का संदेश दिया जाता है।

    दूसरे के वैभव को देखकर ईर्ष्या न करने का संदेश

    उत्तम शौच धर्म का एक महत्वपूर्ण संदेश संतोष से जुड़ा है। दूसरे व्यक्ति का वैभव, ऐश्वर्य, यश, ज्ञान, पुण्य, प्रभाव, परिवार या संपत्ति देखकर ईर्ष्या करने के बजाय मनुष्य को अपनी उपलब्ध परिस्थितियों में संतोष रखना चाहिए। धार्मिक चिंतन के अनुसार मनुष्य जीवन अत्यंत दुर्लभ है। इसलिए अशुभ भावों को बढ़ाने के बजाय आत्मा की शुचिता और आत्मिक उन्नति की दिशा में प्रयास करना ही जीवन का सार है।

    लोभ से बढ़ते हैं अनेक विकार

    धार्मिक मान्यता के अनुसार लोभ मनुष्य को अनेक गलत प्रवृत्तियों की ओर ले जा सकता है। अपनी इच्छाओं और विषय-वासनाओं की पूर्ति के लिए व्यक्ति चोरी, छल-कपट, मायाचारी, हिंसा, अत्यधिक परिग्रह और बैर-भाव जैसी प्रवृत्तियों में फंस सकता है। उत्तम शौच धर्म इन विकारों से दूर रहने और इच्छाओं पर संयम रखने का संदेश देता है। जितना प्राप्त है, उसमें संतोष रखते हुए परमात्मा के प्रति कृतज्ञता का भाव रखना और अपनी आत्मा को निर्मल बनाने का प्रयास करना इस धर्म का प्रमुख संदेश है।

    आत्मशुद्धि से मोक्ष की ओर बढ़ने का संदेश

    दस लक्षण पर्व के माध्यम से जैन समाज में आत्मचिंतन, संयम और साधना की भावना को मजबूत किया जाता है। उत्तम शौच धर्म मनुष्य को बाहरी दिखावे के बजाय अपने भीतर झांकने की प्रेरणा देता है। धार्मिक विचार के अनुसार आत्मा की शुद्धता के लिए लोभ, ईर्ष्या, असंतोष और अन्य अशुभ भावों का त्याग आवश्यक है। शुद्ध भावों और संयमित जीवन के माध्यम से व्यक्ति आत्मिक आनंद तथा मोक्ष के मार्ग की ओर अग्रसर हो सकता है। आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने उत्तम शौच धर्म के संदेश को आत्मसात करने और जीवन में संतोष, संयम तथा आत्मनिरीक्षण को अपनाने का संकल्प लिया।

    मिशनसच न्यूज के लेटेस्ट अपडेट पाने के लिए हमारे व्हाट्सप्प ग्रुप को जॉइन करें।
    https://chat.whatsapp.com/JX13MOGfl1tJUvBmQFDvB1

    अन्य खबरों के लिए देखें मिशनसच नेटवर्क

    https://missionsach.com/category/india

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here