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    सत्य के बिना धर्म की पूर्णता संभव नहीं, सत्य आचरण से होती है आत्मशुद्धि — आचार्य विमर्शसागर जी

    देहरा तिजारा में दसलक्षण महापर्व के पांचवें दिन उत्तम सत्य धर्म की आराधना, धर्मसभा में बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालु

    देहरा तिजारा। दसलक्षण महापर्व के पांचवें दिन देहरा तिजारा में उत्तम सत्य धर्म की आराधना श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ की गई। सुबह से ही मंदिर परिसर में धार्मिक गतिविधियों का सिलसिला चलता रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान जिनेंद्र का अभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन-विधान किया। इसके बाद आयोजित धर्मसभा में दिगम्बराचार्य भावलिंगी संत श्री विमर्शसागर जी महामुनिराज ने उत्तम सत्य धर्म के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला।

    मंदिर अध्यक्ष मुकेश जैन और प्रचार मंत्री उमंग जैन ने बताया की आचार्य श्री ने कहा कि सत्य केवल वाणी से बोले जाने वाला शब्द नहीं, बल्कि व्यक्ति के संपूर्ण जीवन का आचरण है। मन में सच्चाई, वाणी में सत्यता और कर्मों में ईमानदारी ही उत्तम सत्य धर्म की पहचान है।

    उन्होंने कहा कि परिस्थितियां कैसी भी हों, व्यक्ति को सत्य का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए।उन्होंने कहा कि स्वार्थ, भय, क्रोध और लोभ के कारण मनुष्य कई बार सत्य से विमुख हो जाता है। असत्य से भले ही तत्काल लाभ दिखाई दे, लेकिन इससे मन में अशांति और जीवन में अविश्वास उत्पन्न होता है। इसके विपरीत सत्य व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास और शांति का भाव उत्पन्न करता है।

    आचार्य श्री ने श्रद्धालुओं से कहा कि सत्य बोलते समय विवेक और मर्यादा का ध्यान रखना भी आवश्यक है। सत्य ऐसा हो जो हितकारी, संयमित और धर्मानुकूल हो। उन्होंने कहा कि दूसरों के जीवन में सत्य खोजने से पहले प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं के मन और आचरण का निरीक्षण करना चाहिए।

    आत्मचिंतन और संयम का संदेश धर्मसभा में आचार्य श्री ने दसलक्षण महापर्व को आत्मचिंतन और आत्मशुद्धि का पर्व बताते हुए कहा कि इन दस दिनों में व्यक्ति को अपने भीतर के विकारों को पहचानने और उन्हें दूर करने का प्रयास करना चाहिए। उत्तम सत्य धर्म मनुष्य को छल-कपट से दूर रहकर शुद्ध एवं सरल जीवन जीने की प्रेरणा देता है।देहरा तिजारा में आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने भाग लिया।

    अभिषेक, शांतिधारा और पूजन के बाद धर्मसभा में श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री के प्रवचन सुने। पूरे मंदिर परिसर में धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।इस दौरान मंदिर अध्यक्ष मुकेश जैन, महामंत्री नरेंद्र जैन, कोषाध्यक्ष शिंभू जैन, प्रचार मंत्री उमंग जैन, चातुर्मास अध्यक्ष सुरेश जैन, अमन जैन, शैलू जैन, सुरेंद्र जैन, अनिल जैन एवं राकेश जैन सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।

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