लक्ष्मणगढ़ में पंचकल्याणक महोत्सव में तप कल्याणक के अवसर पर श्रद्धालु हुए भावविभोर
लक्ष्मणगढ़। कस्बे में आयोजित पंचकल्याणक महोत्सव के चौथे दिन गुरुवार को भगवान आदिनाथ (ऋषभदेव) का तप कल्याणक श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत पूर्ण विधि-विधान के साथ भगवान के अभिषेक एवं पूजन से हुई, जिसके बाद तप कल्याणक से जुड़े धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए गए।

अयोध्या धर्म नगरी विशेष पंडाल में भगवान आदिनाथ के वैराग्य, दीक्षा और तपस्या पर आधारित धार्मिक नाट्य मंचन प्रस्तुत किया गया। भावपूर्ण प्रस्तुति ने उपस्थित श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक वातावरण से जोड़ दिया और पूरा पंडाल भक्तिमय माहौल से गूंज उठा।
आयोजकों ने बताया कि भगवान आदिनाथ ने सांसारिक वैभव और राजसुख का त्याग कर अपने पुत्रों भरत और बाहुबली को राज्य सौंपा तथा सिद्धार्थ वन में वटवृक्ष के नीचे मुनि दीक्षा ग्रहण की। इसके बाद उन्होंने दीर्घकाल तक कठोर तपस्या कर आत्मकल्याण का मार्ग अपनाया।
कार्यक्रम के दौरान भगवान के प्रथम आहार प्रसंग का भी स्मरण कराया गया। बताया गया कि एक वर्ष की कठिन तपस्या के बाद वैशाख शुक्ल तृतीया (अक्षय तृतीया) के दिन हस्तिनापुर के राजा श्रेयांश ने गन्ने के रस का आहार अर्पित किया था, जिसे जैन परंपरा में अत्यंत पवित्र माना जाता है।
महोत्सव समिति की ओर से अध्यक्ष अशोक अगोनी, सकल जैन समाज के अध्यक्ष सुमेरचंद जैन तथा अन्य पदाधिकारियों ने आयोजन में सहयोग देने वाले समाजसेवियों, पत्रकारों, मंदिर निर्माण में योगदान देने वाले दानदाताओं एवं कार्यकर्ताओं का शॉल और स्मृति चिह्न देकर सम्मान किया।
इस अवसर पर मुनि श्री ज्ञान भूषण जी महाराज ने अपने प्रवचनों में पंचकल्याणकों के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि तीर्थंकरों का जीवन मानवता को सत्य, संयम, त्याग और आत्मकल्याण का संदेश देता है। उन्होंने जीवों के प्रति दया, करुणा और अहिंसा को सर्वोच्च धर्म बताते हुए कहा कि धार्मिक आयोजनों का वास्तविक उद्देश्य इन मूल्यों को जीवन में उतारना है।
मिशनसच न्यूज के लेटेस्ट अपडेट पाने के लिए हमारे व्हाट्सप्प ग्रुप को जॉइन करें।
https://chat.whatsapp.com/JX13MOGfl1tJUvBmQFDvB1
अन्य खबरों के लिए देखें मिशनसच नेटवर्क

