संत समागम में श्रीराम मंदिर निर्माण की घोषणा, महामंडलेश्वर अभिरामदास महाराज का हुआ अभिनंदन
भरतपुर। सिद्ध लटूरिया हनुमान आश्रम में भव्य श्रीराम मंदिर निर्माण की घोषणा करते हुए संत समाज द्वारा मंदिर का शिलान्यास किया गया। इस अवसर पर देशभर से आए संतों की उपस्थिति में धार्मिक जयघोष के साथ कार्यक्रम का आयोजन हुआ।
लटूरिया हनुमान भक्त मंडल एवं तपस्वी बाबा रामशरणदास महाराज के शिष्यों की ओर से आयोजित इस संत समागम में महंत भानूदास महाराज और महंत मणिरामदास महाराज के सानिध्य में कार्यक्रम संपन्न हुआ। संतों ने अयोध्या धाम के बाद भरतपुर के सिद्ध लटूरिया हनुमान आश्रम में भव्य श्रीराम मंदिर निर्माण की घोषणा की।
इस दौरान हिमालय निवासी महामंडलेश्वर अभिरामदास महाराज, चक्रवर्ती दशरथ राजमहल अयोध्या के महंत बिन्दुगाद्याचार्य महाराज, जानकी घाट अयोध्या के रसिक पीठाधीश्वर जनमेजय महाराज, महंत भानूदास महाराज, महंत मणिरामदास महाराज सहित देश-विदेश से आए संतों ने विधि-विधान से श्रीराम मंदिर का शिलान्यास किया। कार्यक्रम के दौरान आश्रम परिसर में “जय श्रीराम”, “श्री सीताराम” और “लटूरिया हनुमान” के जयकारों से वातावरण गूंज उठा।
रविवार को कार्यक्रम के अंतर्गत गाय पूजन और संत सेवा का आयोजन किया गया। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की माता हीराबेन मोदी और उनके छोटे भाई पंकज मोदी के गुरु हिमालय निवासी महामंडलेश्वर अभिरामदास महाराज का अभिनंदन कर विदाई दी गई।
विदाई से पूर्व महामंडलेश्वर अभिरामदास महाराज ने लटूरिया हनुमान, शिव और शनिदेव के दर्शन कर विश्व शांति, देश के विकास, मानव कल्याण, पर्यावरण की शुद्धता और समाज में अमन-शांति की कामना की। साथ ही श्रद्धालुओं को संत सेवा, मानव सेवा, गौसेवा और मूक-बधिर प्राणियों की रक्षा का संकल्प भी दिलाया।
इस अवसर पर अयोध्या के संत रामदास महाराज, सीताराम गुप्ता, डॉ. विनोद गुप्ता, त्रिवेणी गुप्ता, दीपिका गुप्ता, पंडित महेशचंद, डोरीलाल शर्मा, विष्णु मित्तल, टीकम बंजी, हेमराज गोयल, सतीशचंद मित्तल सहित कई श्रद्धालुओं ने अंतरराष्ट्रीय संत महामंडलेश्वर अभिरामदास महाराज, महंत भानूदास महाराज, महंत रामदास और महंत मणिरामदास महाराज का अभिनंदन किया।
विश्वभर में भारत ही संतों की तपोभूमि
महामंडलेश्वर अभिरामदास महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि भारतभूमि संतों की तपोभूमि है और यहां जन्म लेने के लिए देवता भी तरसते हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन अत्यंत दुर्लभ है और इसका उपयोग धर्म, सेवा और मानव कल्याण के कार्यों में करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आज दुनिया के कई देशों में युद्ध और अशांति का माहौल है, जबकि भारत में शांति और समृद्धि बनी हुई है। इसका प्रमुख कारण सनातन धर्म और संतों की तपस्या है। संत समाज हमेशा समाज और मानवता की खुशहाली के लिए तप करता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से सनातन धर्म का पालन करते हुए भगवान श्रीराम के गुणगान और जाप करने का आह्वान किया।
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