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    वन राज्यमंत्री ने जनसुनवाई कर आमजन की परिवेदनाएं सुनी, समस्याओं के त्वरित समाधान के दिए निर्देश

    अलवर। राजस्थान सरकार के पर्यावरण एवं वन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  संजय शर्मा ने शुक्रवार को अलवर स्थित अपने निवास 201 रघुमार्ग पर जनसुनवाई कर आमजन की विभिन्न प्रकार की परिवेदनाएं सुनीं और संबंधित विभागों के अधिकारियों को समस्याओं के त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। जनसुनवाई में बड़ी संख्या में फरियादी पहुंचे, जिनमें महिलाएं, बुजुर्ग, युवक, ग्रामीण व शहरी नागरिक शामिल थे। फरियादियों ने बिजली, पानी, सड़क, पेंशन, पुलिस, चिकित्सा, शिक्षा, राशन कार्ड, नामांतरण, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं सहित अन्य विषयों से संबंधित शिकायतें रखीं, जिन्हें मंत्री ने संवेदनशीलता से सुनते हुए संबंधित अधिकारियों को मौके पर ही फोन के माध्यम से या मौखिक रूप से कार्रवाई के निर्देश दिए।

    राज्यमंत्री शर्मा ने कहा कि सरकार की मंशा है कि आमजन को समय पर न्याय मिले और योजनाओं का लाभ सुचारु रूप से मिल सके। इसके लिए अधिकारियों को अपने दायित्वों के प्रति सजग रहना होगा और आमजन की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए उन्हें शीघ्रता से हल करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी शिकायत का निस्तारण केवल कागजी खानापूर्ति नहीं होना चाहिए, बल्कि फरियादी को समाधान की जानकारी दी जानी चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि वह संतुष्ट हो।

    जनसुनवाई के दौरान बिजली आपूर्ति में अनियमितता, पेयजल किल्लत, सड़कों की मरम्मत, जलभराव, शौचालय निर्माण, विधवा व वृद्धावस्था पेंशन में देरी, आधार सीडिंग, राशन कार्ड त्रुटि, छात्रवृत्ति स्वीकृति, बेरोजगारी भत्ता पंजीकरण जैसे विषयों पर परिवेदनाएं प्राप्त हुईं। राज्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे प्राप्त परिवेदनाओं को तात्कालिक रूप से निस्तारित करें और जिन मामलों में तकनीकी या प्रक्रियागत कारणों से समय लगना स्वाभाविक है, उनमें समयसीमा तय कर समाधान करें। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि किसी भी पात्र व्यक्ति को योजनाओं का लाभ वंचित न रह जाए।

    इस अवसर पर राज्यमंत्री शर्मा ने एक महिला की पेयजल समस्या पर जलदाय विभाग के अभियंता को तुरंत क्षेत्र का निरीक्षण करने और पाइपलाइन सुधारने के निर्देश दिए। वहीं बिजली कटौती को लेकर आई शिकायत पर जोनल इंजीनियर को ट्रांसफार्मर की जांच और फॉल्ट सुधार के लिए टीम भेजने के लिए कहा। एक विधवा महिला द्वारा पेंशन स्वीकृति में हो रही देरी पर समाज कल्याण अधिकारी को मौके पर बुलाकर दस्तावेज जांच करवाए गए और 72 घंटे में प्रक्रिया पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।

    राज्यमंत्री ने सभी अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही या टालमटोल की प्रवृत्ति पाई गई, तो संबंधित के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि जन समस्याओं की अनदेखी सरकार की छवि को धूमिल करती है, जिसे किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जनसुनवाई के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि अधिकारी शिकायतकर्ता को यह अवश्य बताएं कि उसकी शिकायत पर क्या कार्रवाई की गई है और कब तक समाधान की उम्मीद की जा सकती है।

    जनसुनवाई के दौरान राज्यमंत्री ने आमजन को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के प्रति जागरूक रहने की भी सलाह दी। उन्होंने कहा कि केंद्र व राज्य सरकार द्वारा सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, युवाओं के कौशल विकास, महिला सशक्तिकरण और किसान हित में अनेक योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनकी जानकारी सभी तक पहुंचना आवश्यक है। पात्र व्यक्ति इन योजनाओं का लाभ लें और जागरूक रहकर प्रक्रियाएं पूर्ण करें।

    राज्यमंत्री ने जनसुनवाई में उपस्थित नागरिकों से “एक पेड़ मां के नाम” अभियान और “हरियालो राजस्थान” कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजना नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। हर व्यक्ति यदि अपने जीवन में एक पौधा लगाकर उसका पालन करे, तो न केवल पर्यावरण को संरक्षण मिलेगा बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ भविष्य भी सुनिश्चित किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि हरियाली, जल संरक्षण और स्वच्छता को जनआंदोलन का रूप देना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

    श्री शर्मा ने यह भी कहा कि जनसुनवाई केवल औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह सरकार और जनता के बीच सीधा संवाद है। इसके माध्यम से शासन की नीतियों की ज़मीनी हकीकत का मूल्यांकन किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जन प्रतिनिधि होने के नाते वे हर संभव प्रयास करेंगे कि आमजन की समस्याएं प्राथमिकता से हल हों और विभागीय समन्वय के माध्यम से सभी का विश्वास अर्जित किया जाए।

    इस जनसुनवाई में बड़ी संख्या में विभागीय अधिकारी भी उपस्थित रहे, जिन्होंने मौके पर ही कई समस्याओं का समाधान किया और संबंधित रजिस्टर में कार्रवाई अंकित की। कुछ मामलों में फरियादियों को आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी देकर आगामी कार्यदिवस में कार्यालय में उपस्थित होने का सुझाव भी दिया गया।

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