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    विश्व प्रसिद्ध श्री महावीर जी का आठ दिवसीय लक्खी मेला जयकारों के साथ शुरू हुआ

    30 मार्च को महावीर जयंती पर सेवा कार्य, 2 अप्रैल को निकलेगी भव्य रथयात्रा; 3 अप्रैल को होगा समापन

    जयपुर। विश्व को ‘जीओ और जीने दो’ का संदेश देने वाले जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर के 2625वें जन्म कल्याणक महोत्सव के उपलक्ष्य में राजस्थान के पावन तीर्थ दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र श्री महावीर जी में शुक्रवार 27 मार्च से आठ दिवसीय विश्व प्रसिद्ध लक्खी मेले का शुभारंभ हो गया। यह मेला 3 अप्रैल तक चलेगा, जिसमें देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु भाग लेंगे।

    मेले का शुभारंभ मुख्य द्वार पर ध्वजारोहण के साथ किया गया। दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र श्री महावीर जी के अध्यक्ष सुधांशु कासलीवाल और मंत्री उमरावमल संघी ने बताया कि आगामी दिनों में पूजन, भजन, सामूहिक आरती और शास्त्र प्रवचन जैसे धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होंगे।

    महावीर जयंती पर होंगे सेवा और धार्मिक आयोजन
    सोमवार 30 मार्च को महावीर जयंती धूमधाम से मनाई जाएगी। इस दिन प्रातः प्रभात फेरी, ध्वजारोहण और जल यात्रा निकाली जाएगी। इसके साथ ही स्कूलों में मोदक वितरण, अस्पतालों में मरीजों को फल वितरण और हिंडौन जेल में कैदियों को फल वितरित किए जाएंगे।

    दोपहर में सामूहिक पूजन, कलशाभिषेक और प्रदर्शनी का उद्घाटन किया जाएगा। इसके अलावा दिव्यांगजनों को ट्राइसाइकिल, कृत्रिम अंग, बैसाखी और जरूरतमंद महिलाओं को सिलाई मशीनें वितरित की जाएंगी। शाम को सामूहिक आरती और रात्रि में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा।

    2 अप्रैल को निकलेगी भव्य रथयात्रा
    गुरुवार 2 अप्रैल को इस मेले का मुख्य आकर्षण विशाल रथयात्रा होगी। यह रथयात्रा मंदिर के कटला परिसर से शुरू होकर गंभीर नदी तट तक पहुंचेगी, जहां भगवान महावीर की प्रतिमा का अभिषेक किया जाएगा। इस रथयात्रा में जैन समाज के साथ-साथ मीणा, गुर्जर सहित विभिन्न समुदायों के लोग भाग लेकर सांप्रदायिक सौहार्द का परिचय देंगे।

    सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रहेगी धूम
    मेले के दौरान प्रतिदिन भक्ति संध्या, लोक नृत्य, लोकगीत, महानाट्य प्रस्तुति और राष्ट्रीय कवि सम्मेलन जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। प्रसिद्ध कलाकारों और संस्थाओं द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाएंगी, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्सव का माहौल बना हुआ है।

    3 अप्रैल को होगा समापन
    मेले का समापन 3 अप्रैल को गंभीर नदी तट पर ग्रामीण खेलकूद और कुश्ती-दंगल के साथ किया जाएगा।

    धार्मिक आस्था और पर्यटन का केंद्र
    श्री महावीर जी का यह पवित्र क्षेत्र अपनी अद्भुत आस्था और अतिशय के लिए प्रसिद्ध है। यहां स्थित मंदिर के ऊंचे शिखर और स्वर्ण कलश श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं। यह स्थल न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि पर्यटन और स्थानीय रोजगार के लिए भी अहम केंद्र बन चुका है।

    मेले में नि:शुल्क चिकित्सा और कृत्रिम अंग वितरण जैसी सेवाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे यह आयोजन केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक सेवा का भी बड़ा उदाहरण बन गया है।

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